कोटा: कोटा स्टेशन पर स्थित बुकिंग कार्यालय में रेलवे की टिकट बिक्री का पैसा जमा कराने गए एक आरक्षण क्लर्क को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा पकड़े जाने का मामला सामने आया है। बाद में RPF ने क्लर्क को राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के हवाले कर दिया, जहां उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। इस घटना को लेकर आरक्षण कार्यालय के कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है।
कर्मचारियों ने अपनी इस समस्या के समाधान के लिए बुधवार को मजदूर संघ के नेतृत्व में सीनियर डीसीएम (मंडल वाणिज्य प्रबंधक) से मुलाकात की और मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
कर्मचारियों ने बताया कि यह घटना रविवार को हुई, जब आरक्षण क्लर्क अरविंद प्रभाकर रोजाना की तरह बुकिंग कार्यालय में टिकट बिक्री से प्राप्त पैसा जमा कराने गए थे। चूंकि बड़ी मात्रा में नकदी थी, अरविंद ने अपनी मोटरसाइकिल बुकिंग कार्यालय के पास खड़ी की और कैश जमा कराने चले गए।
इसी दौरान, RPF जवानों ने अरविंद को "गलत जगह बाइक खड़ी करने" के आरोप में पकड़ लिया और उन्हें GRP के हवाले कर दिया। GRP द्वारा अरविंद के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे कर्मचारी आक्रोशित हैं।
कर्मचारियों ने जताई नाराजगी:
कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे में कैश लाने की जिम्मेदारी मूल रूप से बुकिंग बाबू की होती है। लेकिन, जब बुकिंग बाबू कैश नहीं ला पाते हैं, तो अन्य कर्मचारियों को खुद ही आकर पैसा जमा करना पड़ता है। कर्मचारियों का तर्क है कि RPF को कैश लाने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए, लेकिन इसके विपरीत, RPF ऐसे कर्मचारियों को ही पकड़ रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले जब बुकिंग बाबू कैश लाते थे, तो RPF सुरक्षा देती थी, लेकिन अब सुरक्षा देने की बजाय कर्मचारियों को ही पकड़ा जा रहा है। कर्मचारियों ने यह भी सवाल उठाया कि दिन भर नो-पार्किंग में खड़े दर्जनों अन्य वाहन RPF को कभी नजर क्यों नहीं आते।
इस घटना ने रेलवे कर्मचारियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था और RPF के रवैये को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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