कोटा। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने पिछले पांच सालों (2021 से अप्रैल 2025 तक) में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस अवधि में आरपीएफ ने देशभर से कुल 61,345 बच्चों को बचाया है। बचाए गए बच्चों में 19,412 लड़कियाँ और 41,933 लड़के शामिल हैं। यह आंकड़ा गुरुवार को मनाए जा रहे विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आरपीएफ के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
आरपीएफ द्वारा बचाए गए बच्चों में विभिन्न श्रेणियों के बच्चे शामिल हैं, जैसे अकेले रहने वाले, गुमशुदा या तस्करी किए गए बच्चे, अपने परिवारों से बिछड़े हुए बच्चे, भीख मांगने वाले, कूड़ा बीनने वाले, रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में बाल श्रम करने वाले, और रेलवे स्टेशन पर रहने वाले बच्चे।
इस अभियान के तहत, आरपीएफ ने कई मामलों में 649 मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया है। आरपीएफ ने बताया कि बच्चों को बचाने के लिए देशभर में 750 से अधिक मानव तस्करी विरोधी इकाइयां (एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स) और 135 बाल सहायता डेस्क (चाइल्ड हेल्प डेस्क) स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 212 और स्टेशनों पर बाल सहायता डेस्क लगाने की घोषणा की है, जिससे इस नेक कार्य को और बल मिलेगा।
आरपीएफ का यह प्रयास बाल अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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