कोटा | कोटा रेल मंडल में इन दिनों एक नए नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रेलवे प्रशासन ने अब रेलकर्मियों की विधवा, तलाकशुदा और अविवाहित बेटियों के लिए 'फ्री यात्रा पास' जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए नोटरी अटेस्टेड शपथ-पत्र अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश के सामने आते ही कर्मचारी संगठनों और सेवानिवृत्त कर्मियों में भारी रोष है।
इस आदेश की सूचना मिलते ही ऑल इंडिया रिटायर्ड रेलवे मेंस फेडरेशन की कोटा मंडल शाखा ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कार्मिक अधिकारियों से मुलाकात कर इस आदेश को पूरी तरह 'तुगलकी' करार दिया।
फेडरेशन का तर्क है कि:
रेलवे बोर्ड (Railway Board) या जबलपुर मुख्यालय की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं हुआ है।
कोटा मंडल के अधिकारियों ने अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए नियम विरुद्ध तरीके से यह आदेश थोपा है।
इस नियम से रिटायर्ड कर्मचारियों को बिना वजह अदालतों के चक्कर काटने होंगे, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होगा।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा विवाद लिव एंड पास विभाग के एक बाबू की मनमानी का नतीजा है। आरोप है कि उस बाबू ने अपनी मर्जी से 'ऑफिस ऑर्डर' तैयार किया, जिसमें अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों के लिए हर साल नोटरी अटेस्टेड शपथ-पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि सहायक कार्मिक अधिकारी ने भी बिना नियमों की पड़ताल किए इस आदेश पर हस्ताक्षर कर इसे लागू कर दिया, जबकि रेलवे मैन्युअल में ऐसे किसी प्रावधान का उल्लेख नहीं है।
मामला बढ़ता देख और फेडरेशन की आंदोलन की चेतावनी के बाद अधिकारियों के सुर बदलते नजर आए। पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद रेल अधिकारियों ने फेडरेशन को जल्द ही इस आदेश को वापस लेने का आश्वासन दिया है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल: अधिकारियों से मिलने वालों में फेडरेशन के मंडल अध्यक्ष केसी रावत, सचिव आरके दीक्षित, पीके जैन, मनोज शर्मा, विनोद गुप्ता और भीमसिंह पचौरी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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