कोटा: कोटा रेल मंडल में रेलवे बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर लोको पायलटों से लगातार नाइट ड्यूटी कराए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस अनियमितता के चलते रेल संरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं और लोको पायलटों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
रेलवे बोर्ड के स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार, रनिंग स्टाफ से एक बार में अधिकतम चार रात्रिकालीन ड्यूटी ही लगातार करवाई जा सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि चार नाइट ड्यूटी कराई जाती हैं, तो उनमें से चौथी ड्यूटी मुख्यालय के लिए अनिवार्य है। इस नियम का पालन न होने की स्थिति में, लोको पायलट से लगातार तीन से अधिक नाइट ड्यूटी नहीं करवाई जा सकती हैं।
हालांकि, कोटा रेल मंडल के कुछ अधिकारियों द्वारा इन नियमों की खुल्लम-खुल्ला अनदेखी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, लगातार नाइट ड्यूटी कराकर लोको पायलटों पर अत्यधिक कार्यभार डाला जा रहा है, जिससे उनकी सेहत और एकाग्रता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और दुर्घटना की आशंका बढ़ रही है।
बुधवार रात को भी एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया। एक लोको पायलट, जो पहले से ही लगातार तीन रात्रिकालीन ड्यूटी कर चुका था, उसे रात 2 बजे अचानक कॉल देकर सकतपुरा के लिए रवाना कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस नियम विरुद्ध ड्यूटी को कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करने के लिए भी गलत तरीका अपनाया गया, क्योंकि रेलवे का कंप्यूटर सिस्टम सामान्यतः इस प्रकार की अनियमित ड्यूटी को स्वीकार नहीं करता है। आशंका जताई जा रही है कि यदि गहन जांच की जाए तो ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं।
ड्यूटी आवंटन में इस प्रकार की गंभीर लापरवाही किसी भी दिन रेल संरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। जानकारों का मानना है कि लगातार नाइट ड्यूटी के कारण लोको पायलट थकान और नींद की कमी से जूझ सकते हैं, जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो सकती हैं। इस मामले में उच्च अधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप कर नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए ताकि रेल यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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