जयपुर: देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारकर सुर्खियों में आए निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजस्थान हाईकोर्ट ने उपचुनाव के बाद समरावता में हुए उपद्रव प्रकरण में नरेश मीणा को जमानत दे दी है। जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने नरेश की तीसरी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। आठ माह बाद मीणा जेल से बाहर आएंगे।
जानकारी के अनुसार, नरेश मीणा 13 नवंबर 2024 से जेल में बंद थे। अब निचली अदालत में जमानत-मुचलके पेश होने के बाद उनका जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
अधिवक्ता का तर्क और सरकार का विरोध: याचिका में नरेश मीणा के अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना के चलते यह मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि उपद्रव में मीणा का कोई हाथ नहीं था और न ही उनकी कोई सक्रिय भूमिका थी। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि इस प्रकरण में 144 गवाहों के बयान होने हैं, जिसमें काफी लंबा समय लगेगा। इसके अतिरिक्त, प्रकरण से जुड़े सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
इसके जवाब में राज्य सरकार ने नरेश मीणा की जमानत का पुरजोर विरोध किया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि नरेश मीणा ने ही लोगों को उपद्रव के लिए उकसाया था। उसके कहने पर ही वाहन जलाए गए और पुलिसकर्मियों से मारपीट की गई। सरकार ने बताया कि इस घटना में 27 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं और 42 वाहन जलाए गए। इसलिए मीणा को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी नरेश मीणा को जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए।
क्या था समरावता प्रकरण? गौरतलब है कि देवली-उनियारा सीट पर उपचुनाव के दौरान समरावता गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर रखा था। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा वहां ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। इसी दौरान मीणा ने अधिकारियों पर ग्रामीणों से जबरन मतदान कराने का आरोप लगाते हुए मतदान बूथ पर मौजूद एसडीएम अमित चौधरी से धक्का-मुक्की की और उन्हें थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी, जिसमें वाहनों को आग लगाई गई और पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने नरेश मीणा के खिलाफ कई संगीन मामले दर्ज किए थे। बता दें कि गत तीस मई को हाईकोर्ट ने थप्पड़ कांड से जुड़े एक अन्य मामले में नरेश मीणा की द्वितीय याचिका स्वीकार कर उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे।
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