जयपुर: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को वन और पर्यावरण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान वन मंत्री संजय शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगे। कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया और भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने वन मंत्री पर कई सवाल उठाए और उनकी कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया।
कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया का आरोप:
कुशलगढ़ से कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया ने वन मंत्री पर फोन नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के खुमनी हाला गांव का रास्ता वन विभाग ने खाई खोदकर बंद कर दिया है, जिससे 150 बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने वन मंत्री को कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्होंने कहा, "अगर मंत्री विधायक का फोन नहीं उठाएंगे, तो आम जनता का क्या हाल होगा?" उन्होंने वन मंत्री से अपील की कि कम से कम विधायकों का तो फोन उठाया करें, क्योंकि वे उन्हें परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि गंभीर समस्याओं के लिए फोन करते हैं।
विधायक खड़िया ने यह भी आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के लोगों को अभी तक वन अधिकार पट्टे नहीं दिए गए हैं और वन विभाग आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित कर रहा है।
भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने भी उठाए सवाल:
भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने भी वन मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके एक सवाल का अधूरा जवाब दिया गया और उनके क्षेत्र में करोड़ों रुपये के सागवान की अवैध कटाई और तस्करी की गई, लेकिन वन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के मवासा व्यास गांव में एक पूर्व विधायक ने वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बंगला बना लिया, लेकिन विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
वन मंत्री से जवाब की मांग:
दोनों विधायकों ने वन मंत्री से इन मुद्दों पर जवाब देने की मांग की और कहा कि वन विभाग की लापरवाही को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से इन मामलों में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
अन्य आरोप:
यह घटना राजस्थान विधानसभा में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है और जनता की समस्याओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
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