कोटा | उत्तर मध्य रेलवे के कोटा स्थित रेलवे अस्पताल में अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने रेलवे के चिकित्सा प्रबंधों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां भर्ती मरीजों की देखभाल करना तो दूर, उन्हें अपना कचरा तक खुद फेंकना पड़ रहा है।
ताजा मामला तुगलकाबाद टीआरएस के रिटायर्ड कर्मचारी छत्रपाल का है, जो पिछले करीब ढाई महीने से इस अस्पताल में भर्ती हैं। छत्रपाल न केवल दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं, बल्कि उनके हाथ में भी फ्रैक्चर है। इसके बावजूद, अस्पताल का नर्सिंग और सफाई स्टाफ वार्ड से गायब रहता है।
गंभीर हालत में होने के बाद भी छत्रपाल को खुद डस्टबिन उठाकर बाहर कचरा फेंकने जाना पड़ता है।
मरीज छत्रपाल ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि:
वार्ड में समय पर सफाई नहीं होती, जिससे कचरे से बदबू आने लगती है।
मजबूरी में उन्हें खुद ही उठकर कचरा बाहर डालना पड़ता है।
मदद के लिए आवाज देने पर भी कोई स्टाफ कर्मचारी मौके पर नहीं आता।
अधिकारियों के ऑफिस अक्सर खाली पड़े रहते हैं और कोई सुनने वाला नहीं है।
अस्पताल की इस बदहाली का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि किस तरह एक बुजुर्ग और बीमार मरीज को सिस्टम की लापरवाही के कारण खुद मशक्कत करनी पड़ रही है। इस घटना ने रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों में भारी रोष पैदा कर दिया है।
जहां एक ओर रेलवे अपने बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने का दावा करता है, वहीं रेलवे अस्पताल की यह जमीनी हकीकत दावों की पोल खोल रही है। अब देखना यह है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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