एसआई भर्ती-2021: राजस्थान हाईकोर्ट ने 4 आरोपियों को दी जमानत, भर्ती रद्द करने के आदेश पर खंडपीठ में बहस तेज

एसआई भर्ती-2021: राजस्थान हाईकोर्ट ने 4 आरोपियों को दी जमानत, भर्ती रद्द करने के आदेश पर खंडपीठ में बहस तेज

जयपुर। राजस्थान की चर्चित उपनिरीक्षक (SI) भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट से दो महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं। एक ओर जहाँ एकलपीठ ने मामले के चार आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर भर्ती रद्द करने के आदेश के खिलाफ खंडपीठ में सुनवाई हुई।

1. चार आरोपियों को मिली जमानत

जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की एकलपीठ ने आरोपी कैलाश कुमार, मंगलाराम, परमेश चौधरी और विनोद कुमार जाट की जमानत याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है।

  • अदालत का तर्क: कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की वर्तमान स्थिति, आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि और ट्रायल में लगने वाले समय को देखते हुए इन्हें जमानत दी जा रही है।

  • वकीलों की दलील: बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कड़ीबद्ध साक्ष्य नहीं हैं। इसके अलावा, जांच एजेंसी चार्जशीट पेश कर चुकी है और अन्य सह-आरोपियों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

  • आरोप: अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन पर पेपर खरीदने, बेचने और डमी अभ्यर्थी बैठाने के आरोप थे, जिसका सरकारी वकील ने पुरजोर विरोध किया।


2. भर्ती रद्द करने के आदेश पर खंडपीठ में सुनवाई

एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ में एकलपीठ द्वारा पूरी भर्ती रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई हुई।

वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा की मुख्य दलीलें:

  • SIT की रिपोर्ट का आधार: अदालत को बताया गया कि एसआईटी (SIT) ने अपनी पहली रिपोर्ट 'परीक्षा रद्द करने के टास्क' के आधार पर दी थी। लेकिन बाद में पुनर्विचार कर दूसरी रिपोर्ट दी, जिसमें माना गया कि दोषियों की छंटनी संभव है, इसलिए पूरी भर्ती रद्द करना सही नहीं है।

  • व्यापक स्तर पर नकल नहीं: बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला व्यापक स्तर पर नकल या पेपर लीक का नहीं है। बाबूलाल कटारा ने किसी गैंग के बजाय व्यक्तिगत स्तर पर पेपर दिया था।

  • चयनितों की योग्यता: बताया गया कि चयनित अभ्यर्थियों में से 421 ऐसे हैं जिनका चयन आरएएस (RAS) भर्ती में भी हुआ है, जो उनकी योग्यता को दर्शाता है।

  • सुप्रीम कोर्ट का हवाला: दलील दी गई कि यदि गड़बड़ी सीमित स्तर पर है, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को शून्य घोषित नहीं किया जाना चाहिए।

अगली सुनवाई 15 जनवरी को

खंडपीठ ने चयनित अभ्यर्थियों की ओर से बहस सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी तय की है। उस दिन सरकार और अन्य पक्षकारों की ओर से दलीलें पेश की जा सकती हैं।


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