राजस्थान में आज फिर गूंजेंगे सायरन, छाएगा अंधेरा: 'ऑपरेशन शील्ड' के तहत 41 जिलों में होगा मॉक ड्रिल

राजस्थान में आज फिर गूंजेंगे सायरन, छाएगा अंधेरा: 'ऑपरेशन शील्ड' के तहत 41 जिलों में होगा मॉक ड्रिल

राजस्थान आज एक बार फिर युद्ध जैसी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। 'ऑपरेशन शील्ड' के तहत आज शाम राज्य के 41 जिलों में मॉक ड्रिल और ब्लैक आउट का अभ्यास किया जाएगा। इस दौरान सायरन की गूंज, पूर्ण ब्लैकआउट, घायलों को बचाने के लिए स्वयंसेवकों और मेडिकल टीमों की भागदौड़ और सेना की तैनाती का अभ्यास किया जाएगा।

यह मॉक ड्रिल राजस्थान सहित चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य युद्धक विमान और ड्रोन हमलों जैसी आपातकालीन स्थितियों में तैयारियों का परीक्षण करना है, ताकि भविष्य में किसी भी कमजोरी का सामना न करना पड़े। सभी जिलों से मॉक ड्रिल अभ्यास की विस्तृत रिपोर्ट ली जाएगी, जिसके आधार पर तैयारियों का मूल्यांकन किया जाएगा।

मुख्य सचिव के निर्देश: गोपनीयता और त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर

मुख्य सचिव सुधांश पंत ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि मॉक ड्रिल और ब्लैक आउट के समय और स्थान को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाए। उन्होंने रिस्पांस टाइम को बेहतर करने पर विशेष ध्यान देने और सभी सायरनों की जांच करने के आदेश दिए हैं, ताकि कोई कमी न रहे।

जयपुर में विशेष जगह पर होगा 'मॉक ड्रिल'

जयपुर जिले में 'ऑपरेशन शील्ड' के तहत एक विशेष स्थान पर मॉक ड्रिल और ब्लैक आउट का पूर्वाभ्यास किया जाएगा। जहां मॉक ड्रिल होगी, वहीं पर ब्लैक आउट प्रभावी रहेगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बनी रहेगी। जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने लोगों से घरों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों और वाहनों की लाइट बंद कर ब्लैक आउट में सहयोग करने की अपील की है।

अतिरिक्त जिला कलक्टर (दक्षिण) संतोष मीणा ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर द्वितीय सिविल डिफेंस अभ्यास (ऑपरेशन शील्ड) के तहत ड्रोन हवाई हमले के समय राहत एवं बचाव के लिए यह मॉक ड्रिल होगा। जिस स्थान विशेष पर मॉक ड्रिल का आयोजन होगा, उसी स्थान पर सायरन सुने जाने तक के परिधि क्षेत्र में रात्रि में ब्लैक आउट किया जाएगा। उस क्षेत्र में रात के समय सायरन बजाकर लोगों को ब्लैक आउट की सूचना दी जाएगी।

अभ्यास का स्वरूप:

  • घायलों का बचाव: सिविल डिफेंस वार्डन, स्थानीय प्रशासन, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट्स-गाइड्स सहित अन्य स्वयंसेवकों द्वारा घायलों को बचाने के लिए भागदौड़ का अभ्यास।
  • दुश्मन के हमलों पर जवाबी कार्रवाई: दुश्मन के हवाई हमलों (विमान, ड्रोन और मिसाइल) पर जवाबी कार्रवाई का प्रदर्शन।
  • सायरनों का परीक्षण: आपात स्थिति में सूचना देने वाले सायरनों का परीक्षण।
  • पूर्ण ब्लैकआउट: चिन्हित अति संवेदनशील क्षेत्रों में करीब 15 मिनट तक पूर्ण ब्लैकआउट। आवश्यक सेवाएं इस दौरान मुक्त रहेंगी।
  • सैन्य क्षेत्र पर हमला नाकाम करना: सैन्य क्षेत्र पर ड्रोन हमला नाकाम करने का अभ्यास।
  • घायलों को सुरक्षित पहुंचाना: स्थानीय प्रशासन द्वारा 20 घायलों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाने का अभ्यास।
  • अस्पतालों में तैयारी: बड़ी संख्या में अस्पतालों में घायलों के पहुंचने और वहां रक्त की उपलब्धता की जांच।
  • गृह रक्षक दलों की तैनाती: सीमा क्षेत्र में गृह रक्षक दलों की सेना के साथ त्वरित तैनाती।

यह उल्लेखनीय है कि 7 मई को भी युद्ध की इन आपात परिस्थितियों को लेकर मॉक ड्रिल हुई थी, लेकिन उसमें कुछ तैयारियों में कमजोरी सामने आई थी। इस बार का अभ्यास उन कमजोरियों को दूर करने और राज्य को किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार करने पर केंद्रित है।

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