कोटा | राजस्थान के कोटा संभाग में कांग्रेस की अंतर्कलह एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सड़कों पर आ गई है। शुक्रवार को कोटा जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित 'संगठन बढ़ाओ लोकतंत्र बचाओ' अभियान की बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और कद्दावर नेता प्रहलाद गुंजल के समर्थक आपस में भिड़ गए। पार्टी कार्यालय में हुई इस धक्का-मुक्की और हंगामे ने संगठन की मजबूती के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
आगामी निकाय और पंचायती राज चुनावों की रणनीति तैयार करने के लिए जिला और देहात कांग्रेस कमेटी की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी। बैठक में जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज और सह-प्रभारी धर्मराज मेहरा मौजूद थे। जैसे ही चर्चा शुरू हुई, दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच वर्चस्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई।
विवाद का घटनाक्रम:
नारेबाजी की जंग: बैठक के दौरान एक पक्ष ने अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी शुरू की, जिसके जवाब में दूसरे गुट ने भी ऊंचे स्वर में नारे लगाए।
धक्का-मुक्की: नारेबाजी के दौरान देखते ही देखते माहौल इतना गरमाया कि दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एक-दूसरे से उलझ गए और जमकर धक्का-मुक्की हुई।
अव्यवस्था: प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज के सामने ही अनुशासन की धज्जियां उड़ती रहीं और पूरा कार्यालय हंगामे के शोर में डूबा रहा।
कोटा संभाग में प्रहलाद गुंजल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से ही धारीवाल गुट के साथ उनके तालमेल को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शुक्रवार की घटना ने यह साफ कर दिया कि पार्टी के शीर्ष स्तर पर भले ही एकजुटता दिखाने की कोशिश हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच गहरी खाई है।
जहाँ एक ओर भाजपा 'डबल इंजन' सरकार के विकास कार्यों के दम पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस की यह गुटबाजी पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है।
प्रभारी की नसीहत: हंगामे के बीच जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने कार्यकर्ताओं को शांत कराते हुए कहा, "हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिलकर चुनाव लड़ना है। इस तरह की अनुशासनहीनता संगठन को कमजोर करती है।" हालांकि, प्रभारी की इस अपील का कार्यकर्ताओं पर खास असर दिखाई नहीं दिया।
हैरानी की बात यह रही कि जिस बैठक का नाम 'संगठन बढ़ाओ' रखा गया था, उसमें संगठन बढ़ने के बजाय आपसी कलह बढ़ती नजर आई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कोटा कांग्रेस में इन दो बड़े धड़ों के बीच जल्द समन्वय नहीं बैठाया गया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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