राखी के दिन दो भाइयों का इंतजार कर रही थी बहन, एक की मौत, दूसरा घायल

राखी के दिन दो भाइयों का इंतजार कर रही थी बहन, एक की मौत, दूसरा घायल

 

कोटा। कोटा रेल मंडल के शामगढ़ स्टेशन के पास शुक्रवार को एक हृदय विदारक घटना सामने आई, जिसने राखी के पर्व को मातम में बदल दिया। राखी बंधवाने अपने घर जा रहे दो भाइयों में से एक चलती ट्रेन से गिर गया, और उसकी तलाश में निकले दूसरे भाई को एक अन्य ट्रेन ने टक्कर मार दी। इस हादसे में एक भाई की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। शामगढ़ सिविल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

हादसे का दुखद क्रम

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब के अमृतसर निवासी दो भाई हरप्रीत (छोटा) और हरमनदीप सिंह (बड़ा) मुंबई में काम करते थे। राखी के त्योहार के चलते दोनों मुंबई-अमृतसर स्वर्ण मंदिर मेल (12903) से अपने घर लौट रहे थे। सुबह करीब 6 बजे, शामगढ़ स्टेशन के पास अचानक हरप्रीत चलती ट्रेन से गिर गया। यात्रियों द्वारा सूचना दिए जाने पर हरमनदीप सिंह ने तुरंत चेन खींचकर ट्रेन रोकी और अपने भाई की तलाश में निकल पड़ा।

बहन के 'हेलो-हेलो' के बीच दूसरे भाई को भी लील गई ट्रेन

हरप्रीत की तलाश करते हुए हरमनदीप रेल पटरियों पर चल रहा था। इसी दौरान अमृतसर से उसकी बहन का फोन आ गया। हरमनदीप घटना की जानकारी देते हुए बहन से बात कर रहा था। तभी उसे सामने से आ रही साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन बांद्रा-बीकानेर (04712) का पता नहीं चला और वह उसकी चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि हरमनदीप की मौके पर ही मौत हो गई। उसका शरीर बिखर गया और मोबाइल भी टूट गया। घटना से अनजान बहन अमृतसर से हरमनदीप के मोबाइल पर 'हेलो-हेलो' कहती रह गई। दोनों भाइयों से एक साथ संपर्क टूट जाने से बहन आशंकित हो गई।

पुलिस ने बहन के फोन से की पहचान

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को शामगढ़ अस्पताल ले गई। हरमनदीप के शव को मुर्दाघर में रखवाया गया, जबकि हरप्रीत को मंदसौर रेफर किया गया। हालत गंभीर होने पर उसे मंदसौर से रतलाम और फिर इंदौर रेफर किया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। जानकारी के अनुसार, हरप्रीत का एक हाथ कट गया है। इस समय तक पुलिस दोनों भाइयों की पहचान नहीं कर पाई थी। बाद में पुलिस ने हरमनदीप के टूटे हुए मोबाइल की सिम अपने फोन में डाली, जिसके बाद बहन का फोन आया और उसने पूरी घटना का खुलासा किया।

बहन ने दी भाई को मुखाग्नि

सूचना मिलने पर बहन अपने परिवार के साथ सड़क मार्ग से शनिवार को इंदौर पहुंचीं, जहाँ उन्होंने हरप्रीत से मुलाकात की। इसके बाद, परिवार रविवार को शामगढ़ आ गया। हरमनदीप का शव अमृतसर ले जाने की स्थिति में नहीं होने के कारण, परिजनों ने शामगढ़ में ही उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। समाजसेवियों के सहयोग से हरमनदीप का शामगढ़ में ही अंतिम संस्कार किया गया। जिन हाथों से बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने का इंतजार कर रही थी, उन्हीं हाथों से एक दिन बाद उसे मुखाग्नि देनी पड़ी। इस हृदय विदारक दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।

पुलिस ने बताया कि बड़ा भाई हरमनदीप अविवाहित था, जबकि छोटे भाई हरप्रीत की शादी दो साल पहले ही हुई थी।


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