जयपुर: राजस्थान में भाजपा सरकार के गठन के एक वर्ष बाद भी राजनीतिक नियुक्तियों की सुस्ती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में अध्यक्षों के पद खाली होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के अध्यक्ष का पद पिछले चार महीनों से खाली है। इसके अतिरिक्त, एक सदस्य के निधन के कारण आयोग में सदस्य का पद भी रिक्त है। आयोग का कामकाज धीमा पड़ गया है, जिससे सरकारी नौकरी के इच्छुक युवाओं में निराशा है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान आरपीएससी में पारदर्शिता लाने और इसके कामकाज को सुधारने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी भाजपा शासन में खाली पड़ा है। कांग्रेस सरकार में डीपी जारौली की बर्खास्तगी के बाद से ही यह पद खाली है। वर्तमान में अजमेर के संभागीय आयुक्त को बोर्ड अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। शिक्षा बोर्ड प्रतिवर्ष 10वीं और 12वीं कक्षा के करीब 25 लाख छात्रों की परीक्षा आयोजित करता है और रीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी आयोजित करता है। स्थायी अध्यक्ष के अभाव में बोर्ड का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता लंबे समय से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल ने हाल ही में कहा कि "प्रकृति का नियम है कि पुराने पत्ते गिरते हैं और नए पत्ते आते हैं।" उनका यह बयान संगठन में नए चेहरों को लाने की ओर इशारा करता है। लेकिन कार्यकर्ताओं में यह सवाल बरकरार है कि राजनीतिक पदों पर नियुक्तियां कब होंगी।
कांग्रेस शासन के दौरान 70 निगम-बोर्डों में अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन भाजपा सरकार के एक वर्ष बाद भी केवल 7 बोर्डों में ही नियुक्तियां की गई हैं। संभाग स्तर पर विकास प्राधिकरण के अध्यक्षों के पद भी खाली पड़े हैं। मंत्रिमंडल में भी अभी 6 पद रिक्त हैं।
कई भाजपा नेताओं के पास संगठन और सरकार में दोहरी जिम्मेदारी है। सीआर चौधरी, ओम प्रकाश भडाना और भागीरथ चौधरी जैसे नेताओं के पास एक से अधिक पद हैं। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और जनता में असंतोष है।
राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी से भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरपीएससी और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में स्थायी नियुक्तियां जल्द से जल्द की जानी चाहिए ताकि उनका कामकाज सामान्य हो सके।
निष्कर्ष:
भाजपा सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बाद भी राजनीतिक नियुक्तियों में सुस्ती चिंता का विषय है। महत्वपूर्ण संस्थानों में खाली पद न केवल प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच भी असंतोष बढ़ा रहे हैं। देखना होगा कि सरकार इस दिशा में कब कदम उठाती है।
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