जयपुर: जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड के स्टोर में रविवार देर रात भीषण आग लगने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 8 मरीजों की मौत हो गई, जिनमें 3 महिलाएं शामिल थीं। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, जो आईसीयू के स्टोर रूम में रखी कागज़ात, उपकरण और ब्लड सैंपलर ट्यूब के कारण तेजी से फैली।
हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगाते हुए, मृतकों के परिजनों ने अस्पताल के बाहर धरना दिया।
7 घंटे की लंबी बातचीत के बाद बनी सहमति
हादसे के बाद परिजनों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी रही, जिसके बाद करीब 7 घंटे की लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी। इस बातचीत में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ और जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी शामिल थे।
-
परिजनों की मांग: परिजनों ने प्रत्येक मृतक के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की थी।
-
प्रशासन का आश्वासन: गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने परिजनों को आश्वासन दिया कि सरकार हरसंभव मदद करेगी और सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा और अन्य सहायता दी जाएगी।
मुआवजे की राशि का ऐलान शेष
प्रशासन ने हरसंभव मदद का आश्वासन तो दिया है, लेकिन मुआवजे की राशि की घोषणा अभी बाकी है। सहमति बनने के बाद, मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा जा रहा है।
हादसे के समय न्यूरो आईसीयू में 11 मरीज और पास के दूसरे आईसीयू में 13 मरीज भर्ती थे। ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर और वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पहले ही इस हादसे की जाँच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
#SMSHospitalFire #JaipurTragedy #Compensation #ParivaronKiMaang #SMSअस्पताल #RajasthanNews