कोटा स्टेशन पर 'स्टॉल बनाम ट्रॉली' विवाद गहराया: नियमों को ताक पर रखकर हो रहा संचालन, प्रशासन मौन

कोटा स्टेशन पर 'स्टॉल बनाम ट्रॉली' विवाद गहराया: नियमों को ताक पर रखकर हो रहा संचालन, प्रशासन मौन

कोटा। कोटा रेलवे स्टेशन पर वेंडर्स के बीच छिड़ा विवाद अब गहराता जा रहा है। स्टॉल और ट्रॉली संचालकों के बीच आए दिन होने वाली झड़पों के पीछे रेलवे के नियमों की अनदेखी और अधिकारियों की कथित लापरवाही सामने आ रही है। मंगलवार को हुई भिड़ंत के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

लोकेशन का खेल: '1-A' की स्टॉल प्लेटफॉर्म नंबर '1' पर कैसे?

ट्रॉली संचालकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि प्लेटफॉर्म नंबर एक पर हाल ही में खुली नई स्टॉल का आवंटन असल में प्लेटफॉर्म नंबर 1-A के लिए हुआ था।

  • नक्शे में हेरफेर: रेलवे के आधिकारिक नक्शे में स्टॉल की स्थिति 1-A पर दर्शाई गई है, और स्टॉल पर भी '1-A' ही अंकित है।

  • अवैध जगह: इसके बावजूद, तत्कालीन सीनियर डीसीएम की मौजूदगी में इस स्टॉल को प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर लगा दिया गया।

  • दूरी का उल्लंघन: स्टॉल अपनी निर्धारित जगह से भी करीब 10-12 फीट दूर हटकर संचालित हो रही है, जो तकनीकी रूप से नियमों के विरुद्ध है।

9 साल बाद भी 'फिक्स' नहीं हुई ट्रॉली

दूसरी ओर, स्टॉल संचालकों ने ट्रॉली वेंडर्स पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि रेलवे बोर्ड ने 2017 में ही निर्देश दिए थे कि सभी ट्रॉलियों के पहिए निकालकर उन्हें प्लेटफॉर्म पर एक निश्चित स्थान पर 'फिक्स' कर दिया जाए।

  • देश के कई रेल मंडलों में यह आदेश लागू हो चुका है, लेकिन कोटा मंडल में 9 साल बाद भी ट्रॉली संचालक प्लेटफॉर्म पर घूम-घूम कर सामान बेच रहे हैं।

  • स्टॉल संचालकों का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार ज्ञापन दिए और RTI भी लगाई, लेकिन हर बार अधिकारियों से 'कार्यवाही जारी है' का रटा-रटाया जवाब ही मिला।

बड़ी घटना का अंदेशा

स्टॉल और ट्रॉली संचालकों के बीच वर्चस्व की यह जंग किसी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है। स्टॉल वाले चाहते हैं कि उनके सामने से ट्रॉली हटाई जाए, जबकि ट्रॉली वाले स्टॉल की लोकेशन को अवैध बता रहे हैं। मंगलवार को हुई कहासुनी ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

मुख्य विवाद बिंदु:

  1. आवंटित जगह (1-A) के बजाय मुख्य प्लेटफॉर्म (1) पर स्टॉल का संचालन।

  2. 2017 के बोर्ड आदेश के बावजूद ट्रॉलियों का एक जगह स्थिर न होना।

  3. अधिकारियों द्वारा शिकायतों और RTI पर ठोस कार्रवाई न करना।


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