प्रशासनिक गलियारों में हलचल: ओडिशा के तेजतर्रार IPS जगमोहन मीणा का इस्तीफा; राजस्थान की राजनीति में आने की अटकलें तेज

प्रशासनिक गलियारों में हलचल: ओडिशा के तेजतर्रार IPS जगमोहन मीणा का इस्तीफा; राजस्थान की राजनीति में आने की अटकलें तेज

प्रशासनिक गलियारों में हलचल: ओडिशा के तेजतर्रार IPS जगमोहन मीणा का इस्तीफा; DIG प्रमोशन से ठीक 6 महीने पहले लिया फैसला, राजस्थान की राजनीति में आने की अटकलें तेज

भुवनेश्वर / जयपुर।

भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के गलियारे से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ओडिशा कैडर के 2013 बैच के सीनियर और तेजतर्रार आईपीएस (IPS) अधिकारी जगमोहन मीणा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वर्तमान में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त (DCP) के रूप में कार्यरत जगमोहन मीणा का यह फैसला हर किसी के लिए हैरान करने वाला है, क्योंकि वह मात्र 37 वर्ष के हैं और ठीक 6 महीने बाद उनका प्रमोशन डीआईजी (DIG) के पद पर होने वाला था।

मूल रूप से राजस्थान के अलवर जिले के निवासी होने के कारण, उनके इस स्वैच्छिक इस्तीफे के बाद मरुधरा (राजस्थान) के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि क्या वे जल्द ही खाकी छोड़ खादी पहनने यानी राजस्थान की सक्रिय राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

"इस्तीफा पूरी तरह व्यक्तिगत, प्राइवेसी का सम्मान हो": जगमोहन मीणा

मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में लग रही तरह-तरह की अटकलों और दबाव के दावों पर पूरी तरह विराम लगाते हुए आईपीएस जगमोहन मीणा ने खुलकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह निर्णय किसी बाहरी दबाव या राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं है:

"सबसे पहले मैं यह साफ कर देना चाहता हूँ कि मेरे इस्तीफे के पीछे कोई भी बाहरी कारण या काम का दबाव नहीं है। लगभग 13 साल की शानदार सर्विस के बाद, मैंने अपने दोस्तों और परिवार को ऑनबोर्ड लेकर, काफी लंबी लॉन्ग-टर्म थिंकिंग (Long-Term Thinking) के बाद यह फैसला लिया है। मैंने कुछ दिन पहले अपना इस्तीफा सबमिट कर दिया है, जो अभी प्रक्रिया (Process) में है। मैं चाहता हूँ कि इसमें जो मेरी प्राइवेसी है, उसका सभी सम्मान करें।"

राजस्थान की राजनीति और चुनाव लड़ने के सवाल पर सस्पेंस बरकरार

चूंकि जगमोहन मीणा राजस्थान के अलवर से ताल्लुक रखते हैं और पूर्वी राजस्थान की राजनीति में मीना समुदाय के प्रशासनिक चेहरों का हमेशा से बड़ा दखल रहा है, ऐसे में मीडिया ने उनसे भविष्य के विकल्पों और चुनाव लड़ने को लेकर सीधा सवाल किया।

  • आजीविका के लिए कई विकल्प: राजनीति में आने की अटकलों पर सीधा जवाब न देते हुए उन्होंने मुस्कुराकर बहुत ही व्यावहारिक उत्तर दिया, "भविष्य में आजीविका चलाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा, इसके लिए मेरे पास कई विकल्प मौजूद हैं।"

  • समय आने पर चलेगा पता: चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने सस्पेंस बरकरार रखते हुए कहा, "मेरा यह फैसला अभी पूरी तरह से व्यक्तिगत है। भविष्य की क्या योजनाएं हैं, वह आपको भविष्य में ही पता चलेंगी न। समय आने पर आप सभी लोगों को इसके बारे में पता चल जाएगा।"

बेदाग और शानदार रहा 13 साल का ट्रैक रिकॉर्ड; नक्सल मोर्चे से राजधानी तक लोहा मनवाया

आईपीएस जगमोहन मीणा ने अपने करियर के दौरान हमेशा फील्ड पोस्टिंग में काम किया और ओडिशा के बेहद चुनौतीपूर्ण जिलों में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया। उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

तैनाती क्षेत्र (ओडिशा) पदभार मुख्य कार्य एवं उपलब्धियां
गंजाम ट्रेनिंग एवं बाद में SP करियर की शुरुआत की। अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त कर कानून व्यवस्था मजबूत की।
मलकानगिरी SDPO एवं बाद में SP घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बड़े एंटी-माओवादी अभियान चलाए और माओवादी साये के बीच शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराए।
अनुगुल SP बड़े औद्योगिक क्षेत्र में कोयला सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया और लेबर-मैनेजमेंट लॉ एंड ऑर्डर संभाला।
कटक DCP अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों, बड़े धार्मिक जुलूसों और ऐतिहासिक 'बालीयात्रा मेले' का सफल क्राउड मैनेजमेंट किया।
भुवनेश्वर DCP (वर्तमान) राजधानी क्षेत्र में हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट की सुरक्षा संभाली और आधुनिक शहरी पुलिसिंग को मजबूत किया।

युवाओं और साथी पुलिस अधिकारियों को संदेश: "यह बेहतरीन सर्विस है"

अपने पद से गरिमापूर्ण विदाई लेते हुए जगमोहन मीणा ने ओडिशा की जनता और मुख्यमंत्री/सरकार का आभार व्यक्त किया जिन्होंने हमेशा उन पर अटूट भरोसा जताया। इसके साथ ही उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा:

"यह लोगों की सीधी सेवा करने और पुलिसिंग में सुधार करने का एक बहुत बड़ा और बेहतरीन जरिया है। युवाओं को इसके लिए हमेशा मोटिवेटेड और पॉजिटिव रहना चाहिए। मैंने कभी इस बात की चिंता नहीं की कि 25 या 30 साल की नौकरी के बाद मैं डीजी (DG) बनूँगा या कहाँ पहुँचूँगा। मैंने हमेशा सिर्फ वर्तमान पर ध्यान दिया और अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। मैं मन में बहुत आभार और सकारात्मक भावना के साथ जीवन के अगले पड़ाव की ओर आगे बढ़ रहा हूँ।"

निष्कर्ष:

भले ही जगमोहन मीणा अभी अपनी राजनीतिक योजनाओं को 'व्यक्तिगत' बताकर छुपा रहे हों, लेकिन प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इतनी कम उम्र में और प्रमोशन के मुहाने पर खड़े होकर सिविल सेवा से वीआरएस (इस्तीफा) देना बिना किसी बड़े भविष्य के ब्लूप्रिंट के संभव नहीं है। आने वाले दिनों में राजस्थान की सियासत में उनका अगला कदम बेहद दिलचस्प होने वाला है।

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