कोटा रेलवे की अजीबोगरीब मॉक ड्रिल: 9 दिन पहले हुआ था असली हादसा, अब अभ्यास के नाम पर यात्री परेशान और कर्मचारी लहूलुहान

कोटा रेलवे की अजीबोगरीब मॉक ड्रिल: 9 दिन पहले हुआ था असली हादसा, अब अभ्यास के नाम पर यात्री परेशान और कर्मचारी लहूलुहान

कोटा | 19 मार्च 2026 कोटा मंडल में रेलवे की कार्यप्रणाली और 'मॉक ड्रिल' की प्लानिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सकतपुरा क्रॉसिंग पर 8 मार्च को हुए असली हादसे के ठीक 9 दिन बाद, सोमवार को रेलवे ने उसी स्थान पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया। लेकिन इस कवायद ने सुरक्षा की तैयारी दिखाने के बजाय अव्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।

हादसे वाली जगह ही चुना 'मॉक ड्रिल' का मैदान

गौरतलब है कि 8 मार्च को सकतपुरा और तीरथ स्टेशनों के बीच एक अनमैंड क्रॉसिंग पर मालगाड़ी ने मारुति कार को टक्कर मार दी थी, जिसमें जेके लोन अस्पताल का एक कर्मचारी घायल हुआ था। प्राइवेट लाइन होने के कारण उस समय मामला दब गया, लेकिन सोमवार शाम 5:15 बजे जब डीआरएम ऑफिस का हूटर बजा, तो पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना दी गई कि एक कोयला लदी मालगाड़ी बस से टकरा गई है।

5 ट्रेनें 'पिटीं', हजारों यात्री हुए बेहाल

इस मॉक ड्रिल की टाइमिंग ने यात्रियों की कमर तोड़ दी। कोटा स्टेशन पर मुख्य यातायात को रोककर मेडिकल रिलीफ और दुर्घटना राहत ट्रेनों को रास्ता दिया गया, जिसके कारण:

  • कोटा-श्रीगंगानगर: 50 मिनट प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही।

  • बांद्रा-हरिद्वार देहरादून: प्लेटफॉर्म खाली न होने के कारण 50 मिनट आउटर पर खड़ी रही।

  • जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट: 20 मिनट की देरी।

  • कोटा-पटना: 15 मिनट की देरी।

  • नंदा देवी एक्सप्रेस: 12 मिनट की देरी से चली।

कंटीली झाड़ियों ने किया लहूलुहान, फटे अधिकारियों के कपड़े

मॉक ड्रिल के लिए जिस जगह का चयन किया गया, वहां पहुंचने का कोई सीधा रास्ता ही नहीं था। ट्रैक के दोनों ओर उगी कंटीली झाड़ियों और ऊबड़-खाबड़ गिट्टियों के बीच से गुजरना कर्मचारियों के लिए सजा बन गया।

  • सामान लेकर इंजन तक पहुंचने की जद्दोजहद में कई अधिकारियों के जूतों में कांटे घुस गए और हाथ-पांव छिल गए।

  • झाड़ियों में फंसकर कर्मचारियों के कपड़े तक फट गए।

  • फिसलन भरी गिट्टियों पर कर्मचारी गिरते-पड़ते नजर आए।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

कंटीली झाड़ियों के बीच से बचते-बचाते निकलते रेलकर्मियों के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। यात्रियों और जानकारों का कहना है कि जब रेलवे यात्री सुविधाओं और सुरक्षा का दावा करता है, तो ऐसी अव्यवस्थित मॉक ड्रिल की क्या जरूरत थी जिससे आम जनता को परेशानी हो और खुद के कर्मचारी घायल हों।


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