कोटा। पश्चिम-मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य इंजीनियर (PCE) आशुतोष के कोटा मंडल दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को लापरवाह अधिकारियों और सुपरवाइजरों पर गाज गिरी। निरीक्षण के दौरान मिली खामियों से नाराज PCE ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (SSE) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया और रेल फ्रैक्चर मामले में एक को चार्जशीट थमा दी।
निरीक्षण के दौरान यात्रियों की शिकायतों और तकनीकी खामियों पर PCE का पारा चढ़ गया:
शुभम पाटीदार (IOW, शामगढ़): आलोट स्टेशन पर यात्रियों ने पानी की किल्लत और नलों की टोटियां गायब होने की शिकायत की। इस पर कार्रवाई करते हुए PCE ने उन्हें निलंबित कर दिया।
रंजीत पटेल (PWI, आलोट): ट्रैक निरीक्षण के दौरान कई जगह रेल पटरी की चाबियां (Keys) गायब मिलीं, जिसे सुरक्षा में बड़ी चूक मानते हुए निलंबन के आदेश दिए गए।
12 अप्रैल को महिदपुर और लूनीरिचा के बीच हुए रेल फ्रैक्चर मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पटरी की डिस्ट्रेसिंग और अल्ट्रासोनिक जांच के महज कुछ दिनों बाद ही पटरी टूट गई थी। इस खबर को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद मुख्यालय तक हलचल हुई, जिसके परिणामस्वरूप संबंधित PWI (RFD) को SF-5 (बड़ी पेनल्टी की चार्जशीट) जारी की गई है।
PCE ने रामगंजमंडी स्टेशन पर 12 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज (FOB) का काम अधूरा देख नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि देरी हुई तो ठेकेदार को टर्मिनेट कर दिया जाएगा।
एस्केलेटर और लिफ्ट: कोटा सहित कई स्टेशनों पर एस्केलेटर और लिफ्ट का काम लटका होने पर उन्होंने वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (धर्मेंद्र) के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की।
जहां एक ओर लापरवाही पर गाज गिरी, वहीं गरोठ स्टेशन पर काम की गुणवत्ता और समयबद्धता देख PCE गदगद नजर आए। उन्होंने अधिकारियों और ठेकेदार की पीठ थपथपाई और स्टेशन भवन के सामने फोटोशूट भी करवाया।
माना जा रहा है कि PCE आशुतोष का यह कड़ा रुख रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (CRB) सतीश कुमार के संभावित कोटा दौरे की तैयारियों का हिस्सा है। मुख्यालय किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
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