जयपुर,: केंद्र सरकार ने निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में संशोधन करते हुए 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को खत्म कर दिया है। अब से कक्षा 5वीं और 8वीं में फेल होने वाले छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा। इस फैसले का शिक्षकों ने स्वागत किया है, जबकि अभिभावकों ने कुछ सवाल उठाए हैं।
शिक्षकों का कहना:
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस फैसले से शिक्षा के स्तर में सुधार आएगा। छात्रों और अभिभावकों में यह सोच विकसित हो गई थी कि वे कभी फेल नहीं हो सकते हैं। इस वजह से आगामी बोर्ड परीक्षाओं में उनकी गुणवत्ता बिगड़ रही थी। यह फैसला बच्चों में पढ़ाई के प्रति जागरूकता लाएगा।
शिक्षक नेता अंजनी कुमार शर्मा ने कहा कि इस तरह का संशोधन पहले ही हो जाना चाहिए था। इससे कमजोर विद्यार्थी जब अगली परीक्षा में पहुंच जाते थे, तो उन्हें संबंधित विषय में कमजोरी रह जाती थी।
तृतीय श्रेणी शिक्षक डॉ. रनजीत मीणा ने कहा कि कक्षा 5वीं और 8वीं में पढ़ने वाले छात्र परीक्षाओं को गंभीरता से नहीं लेते थे। अब इस नियम में संशोधन होने के बाद छात्रों और अभिभावकों पर थोड़ा दबाव रहेगा कि परीक्षाओं को गंभीरता से लेना है।
अभिभावकों का कहना:
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने कहा कि छात्र के फेल होने में केवल छात्र ही जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि शिक्षक और स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग से शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के फेल होने के अधिक अनुपात पर भी सवाल उठाए।
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