सरप्लस रेलकर्मियों को पहले हटाया, फिर अनुपस्थित बताकर थमाई चार्जशीट: कैरिज एंड वैगन विभाग का अजब-गजब कारनामा!

सरप्लस रेलकर्मियों को पहले हटाया, फिर अनुपस्थित बताकर थमाई चार्जशीट: कैरिज एंड वैगन विभाग का अजब-गजब कारनामा!

कोटा : रेलवे के कैरिज एंड वैगन विभाग में एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने सरप्लस किए गए कर्मचारियों को हैरान कर दिया है। विभाग ने पहले तो छह कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से रिलीव कर दिया और उन्हें गार्ड (ट्रेन मैनेजर) की ट्रेनिंग के लिए उदयपुर भेज दिया, लेकिन फिर उन्हीं कर्मचारियों को अनुपस्थित बताकर उनके घरों पर चार्जशीट चस्पा कर दीं। इस पूरे घटनाक्रम से कर्मचारी असमंजस में हैं कि वे क्या करें, क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस मामले की जानकारी नहीं है।

पूरा घटनाक्रम

स्टाफ कर्मियों ने बताया कि 14 जुलाई को कार्मिक विभाग ने एक आदेश जारी कर छह कर्मचारियों को सरप्लस घोषित किया। इस आदेश में उन्हें गार्ड (ट्रेन मैनेजर) की ट्रेनिंग के लिए उदयपुर जाने का निर्देश दिया गया था। कार्मिक विभाग के इस आदेश के बाद, कैरिज एंड वैगन विभाग ने इन कर्मचारियों को बाकायदा रिलीव कर दिया। रिलीव होने के बाद, ये कर्मचारी 16 जुलाई को ट्रेनिंग के लिए उदयपुर पहुंच गए।

घरों पर चिपकाई गई चार्जशीट

कर्मचारियों के उदयपुर पहुंचने के बाद, कैरिज एंड वैगन विभाग के अधिकारियों ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने इन कर्मचारियों को अनुपस्थित बताते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट जारी कर दीं। चूंकि कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं थे, ये चार्जशीट उनके घरों पर भिजवाई गईं। जिन कर्मचारियों के घरों पर कोई नहीं मिला, उनके मकान के गेट पर ही चार्जशीट चिपका दी गईं, जबकि कुछ कर्मचारियों की पत्नियों को ये चार्जशीट थमाई गईं।

उदयपुर में ट्रेनिंग कर रहे कर्मचारियों को जब इस बात की सूचना मिली तो वे बेहद परेशान हो गए। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे अपनी गलती कहां तलाशें। कर्मचारी इस दुविधा में हैं कि वे ट्रेनिंग जारी रखें या चार्जशीट का जवाब देने के लिए कोटा वापस आएं। कर्मचारियों का कहना है कि रिलीव होने के बाद वे कैरिज एंड वैगन विभाग के कर्मचारी नहीं रहे, ऐसे में अधिकारियों द्वारा उन्हें चार्जशीट देने का क्या औचित्य है।

वरिष्ठ अधिकारी अनभिज्ञ

जब इस मामले में वरिष्ठ मंडल मैकेनिकल इंजीनियर राकेश मीणा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, "यह मामला मेरी जानकारी में नहीं आया है। नीचे के अधिकारियों को इसकी जानकारी होगी।" उनका यह बयान दर्शाता है कि इस अजीबोगरीब कार्रवाई से उच्च अधिकारी भी वाकिफ नहीं हैं।

यह घटना रेलवे प्रशासन के भीतर समन्वय की कमी और कर्मचारियों के प्रति लापरवाह रवैये को उजागर करती है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष और अनिश्चितता का माहौल है।

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