कोटा। एक तरफ देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रशासन की कथित लापरवाही सामने आई है। रेल कर्मचारियों के बच्चे सोमवार को नंदा देवी ट्रेन से देहरादून-मसूरी घूमने के लिए रवाना हुए, और हैरान करने वाली बात यह है कि लगातार फैल रहे कोरोना संक्रमण के बावजूद प्रशासन ने इन बच्चों को यात्रा की इजाज़त दे दी।
इस बाल शिविर में कुल 35 बच्चे और 10 कर्मचारी शामिल हैं। बच्चों के साथ एक डॉक्टर और एक अधिकारी भी गए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस शिविर के आयोजन में प्रशासन ने नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियम विरुद्ध तरीके से एक "नेताजी" के दो-दो बच्चों को शिविर में जाने की इजाज़त दे दी। "नेताजी" के सामने पूरी तरह नतमस्तक नज़र आए अधिकारियों ने मामला सामने आने के बाद भी अपनी गलती को सुधारना ज़रूरी नहीं समझा। इसके अलावा, अधिकारियों ने ड्यूटी पर साथ जाने वाले कल्याण निरीक्षक के बच्चों को भी शिविर में जाने की अनुमति दे दी, जो नियमों के खिलाफ है।
इस घटना से रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली और कोरोना प्रोटोकॉल के प्रति उसकी गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।
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