हिण्डौनसिटी: रीठोली गांव के ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग को लेकर फिर से सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। ग्रामवासियों की मांग है कि उनके गांव को ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाए। यह मांग तब और मजबूत हुई जब राज्य सरकार ने हाल ही में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लिया।
गौरतलब है कि पिछले 25 वर्षों से ग्रामीण इस मांग को लेकर पंचायती राज के चुनावों का बहिष्कार कर रहे हैं। अब गांव के लोगों ने एकजुट होकर रीठोली को ग्राम पंचायत बनवाने के लिए संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया है।
रीठोली गांव के मंदिर के पास ग्रामीणों ने एक पंचायत का आयोजन किया, जिसमें गांव के वरिष्ठ नागरिकों और युवा वर्ग ने भाग लिया। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्राम पंचायत का दर्जा हासिल करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि इस बार सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
ग्राम पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए ग्रामीणों ने उपखंड कार्यालय से राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाने की योजना बनाई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकार पर दबाव बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।
रीठोली के ग्रामीण पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से अपनी इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। पंचायत चुनावों का बहिष्कार कर उन्होंने अपनी नाराजगी और मांगों को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि एक अलग ग्राम पंचायत बनने से गांव का विकास तेज होगा और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय आसान होगा।
गांव के नागरिकों ने राज्य सरकार से अपील की है कि वे उनकी वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से लें और गांव को ग्राम पंचायत का दर्जा दें। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल उनका अधिकार नहीं, बल्कि गांव के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है।
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