लापरवाही की हद! नदी किनारे खुले में फेंकी गईं लाखों की दवाइयां, जांच के आदेश

लापरवाही की हद! नदी किनारे खुले में फेंकी गईं लाखों की दवाइयां, जांच के आदेश

झालावाड़ - झालावाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। शहर में कालीसिंध नदी के किनारे अज्ञात संस्था द्वारा लाखों रुपये की दवाइयां खुले में फेंक दी गईं। इन फेंकी गई दवाइयों में इंजेक्शन, ड्रिप, टैबलेट और सिरप के दर्जनों पैकेट शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई दवाइयां एक्सपायर हो चुकी हैं, जबकि कई पर उनकी निर्माण या समाप्ति की तारीख स्पष्ट रूप से अंकित नहीं है।

इस घटना को मेडिकल संस्थानों की एक बड़ी लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि ये दवाइयां कहां से आईं और नदी किनारे किसने फेंकीं। स्थानीय लोगों ने जब नदी किनारे दवाइयों के पैकेट बिखरे देखे तो उन्होंने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं और जांच कर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) साजिद खान ने इस संबंध में कहा कि उन्हें नदी किनारे बायोमेडिकल वेस्ट के रूप में दवाइयां मिलने की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि दवाइयों के सैंपल की जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि ये दवाइयां कहां से और कैसे यहां पहुंचीं।

CMHO ने जोर देकर कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की एक निर्धारित प्रक्रिया है, जिसका पालन सभी मेडिकल संस्थानों को अनिवार्य रूप से करना होता है। इस तरह खुले में दवाओं और अन्य मेडिकल सामानों का फेंका जाना एक गंभीर विषय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही मामले की गहन जांच की जाएगी और निजी चिकित्सा संस्थानों से उनके मेडिकल वेस्ट के निस्तारण संबंधी जानकारी मांगी जाएगी।

उधर, कालीसिंध नदी किनारे खुले में बिखरी ये दवाइयां आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण फैला रही हैं। कुछ दवाओं के पैकेट पर बच्चों से दूर रखने की चेतावनी भी छपी हुई है। ऐसे में यदि कोई बच्चा अनजाने में इन दवाओं को उठा लेता है, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। नदी किनारे लोगों का आना-जाना लगा रहता है और गर्मी के दिनों में मवेशी भी यहां पानी पीने आते हैं, जिससे उनके द्वारा इन दवाओं को खा लिए जाने का खतरा भी बना हुआ है। इस लापरवाही ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरण और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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