अरावली की वादियों में बाघों का दीदार हुआ आसान, अलवर बफर जोन बना पर्यटकों का नया ठिकाना

अरावली की वादियों में बाघों का दीदार हुआ आसान, अलवर बफर जोन बना पर्यटकों का नया ठिकाना

अलवर  - बाघ और बघेरे देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए खुशखबरी है। यदि सरिस्का टाइगर रिजर्व में सफारी की बुकिंग फुल हो गई है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। अब अलवर शहर के पास अरावली की शांत वादियों में स्थित सरिस्का के अलवर बफर जोन में भी बाघों की साइटिंग आसानी से हो रही है। यहां मौजूद छह बाघों ने इस क्षेत्र को पर्यटकों के लिए और भी अधिक आकर्षक बना दिया है।

खास बात यह है कि बाला किला बफर जोन का सफारी रूट सरिस्का के मुख्य क्षेत्र की तुलना में छोटा है, जिसके कारण पर्यटकों को सफारी के लिए अधिक शुल्क भी नहीं देना पड़ता। इसके अलावा, इस क्षेत्र में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कई दर्शनीय स्थल भी मौजूद हैं, जो पर्यटकों को एक समृद्ध अनुभव प्रदान करते हैं। यही वजह है कि इन दिनों सरिस्का के साथ-साथ अलवर बफर जोन में भी पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

जब भी बाघ और पैंथर देखने की बात आती है, तो पर्यटकों के मन में सबसे पहले सरिस्का टाइगर रिजर्व का नाम आता है। लेकिन अब पर्यटकों के लिए अलवर का बाला किला बफर जोन भी बाघ, पैंथर, हाइना, सांभर, चीतल, नीलगाय, मोर और अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए एक बेहतरीन विकल्प के रूप में उभरा है। वर्तमान में इस बफर जोन में छह बाघ-बाघिन मौजूद हैं, जिनमें बाघिन 2302, बाघ एसटी 18 और बाघिन एसटी 19 प्रमुख हैं, जिनकी साइटिंग पर्यटकों को अक्सर होती रहती है।

इसके अतिरिक्त, बाला किला बफर जोन में पैंथर भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं और बाला किला रूट पर सफारी करने वाले पर्यटकों को कई बार पैंथर और उनके शावकों को आसानी से देखने का अवसर मिला है। यहां तक कि आसपास के आबादी वाले क्षेत्रों में भी लोगों को अक्सर पैंथर दिखाई देते रहे हैं।

सरिस्का के बाला किला जोन में वन्यजीवों के अलावा कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इनमें मूसी महारानी की छतरी, ऐतिहासिक सागर, सिटी पैलेस, राजकीय संग्रहालय, करणी माता मंदिर, बाला किला, वेपन म्यूजियम, चक्रधारी हनुमान मंदिर और तोप वाले हनुमान मंदिर जैसे कई दर्शनीय स्थल शामिल हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरिस्का टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में सफारी करने की तुलना में बफर जोन में सफारी काफी सस्ती है। सरिस्का के कोर एरिया और बफर जोन के बारा-लिवारी रूट पर 6 पर्यटकों के लिए सफारी का शुल्क लगभग 7620 रुपये है, जबकि सरिस्का की बफर रेंज में बाला किला रूट पर समान संख्या के पर्यटक केवल 2148 रुपये में सफारी का आनंद ले सकते हैं। पिछले कुछ समय में बाला किला रूट पर जाने वाले पर्यटकों को बाघ एसटी 18 और बाघिन एसटी 2302 की अच्छी साइटिंग हुई है। वर्तमान में बाला किला बफर जोन में सफारी के लिए जिप्सी की बुकिंग की ऑफलाइन सुविधा ही उपलब्ध है, जिसके कारण पर्यटकों को प्रतापबंध चौकी पर ऑफलाइन शुल्क जमा करना होता है। प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा ने भी बाला किला बफर जोन में पर्यटकों को हुई बाघिन की साइटिंग पर खुशी जताई है और बाघिन की तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की है।

आगामी दिनों में बाला किला बफर जोन में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। 16 मई से स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने के कारण परिवार गर्मी की छुट्टियों में घूमने की योजना बनाएंगे। अलवर के पास ही बाघ-बघेरों के दर्शन होने और सफारी का शुल्क कम होने के कारण गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटकों के यहां पहुंचने की उम्मीद है।

सरिस्का के सीसीएफ संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि सरिस्का के बाला किला बफर जोन में पर्यटकों के लिए बहुत कुछ है। यहां वन्यजीवों के दीदार के साथ-साथ कई दर्शनीय स्थलों का आनंद भी लिया जा सकता है। सरिस्का और बारा-लिवारी रूट से कम शुल्क होने के कारण पर्यटकों को यहां सफारी करना अधिक आकर्षक लगता है। गर्मियों में पर्यटकों की संभावित वृद्धि को देखते हुए सरिस्का प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं।

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