राजस्थान की सियासत में 'तबादला खेल' का पर्दाफाश! ACB जांच में जलदाय विभाग के चौंकाने वाले खुलासे

राजस्थान की सियासत में 'तबादला खेल' का पर्दाफाश! ACB जांच में जलदाय विभाग के चौंकाने वाले खुलासे

जयपुर | 15 मई, 2026 राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान जलदाय विभाग (PHED) में तबादलों और नियुक्तियों को लेकर एक बड़े 'समानांतर तंत्र' के सक्रिय होने की बात सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच और विभागीय दस्तावेजों ने इस ओर इशारा किया है कि जल जीवन मिशन (JJM) जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में इंजीनियरों की पोस्टिंग तकनीकी योग्यता के बजाय 'नेटवर्क' और 'प्रभाव' के आधार पर की गई थी।


22 महीने, 40 तबादला सूचियां और 'समानांतर तंत्र'

विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री के लगभग 22 महीने के कार्यकाल में तबादलों की बाढ़ सी आ गई थी। इस दौरान 40 से अधिक तबादला सूचियां जारी की गईं।

जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु:

  • घंटों में बदले आदेश: कई तबादला आदेश तो ऐसे थे जो सुबह जारी हुए और दोपहर होते-होते उनमें संशोधन कर दिया गया या उन्हें निरस्त (Cancel) कर दिया गया।

  • बिना काम के अधिकारी: लगभग 35 इंजीनियरों को तबादले के चंद घंटों बाद ही 'पदस्थापन की प्रतीक्षा' (APO) में डाल दिया गया। कई अधिकारियों को महीनों तक बिना किसी जिम्मेदारी के बैठाए रखा गया।

  • पसंद की पोस्टिंग: चर्चा है कि सहायक अभियंता (AEN) से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर तक की पोस्टिंग में 'ठेकेदारों की पसंद' और 'सेवा शुल्क' जैसे शब्दों का बोलबाला था।


150 किमी दूर तक 'एडिशनल चार्ज' का खेल

जेजेएम के भारी-भरकम बजट वाले प्रोजेक्ट्स में इंजीनियरों को नियम-कायदों को ताक पर रखकर प्रभार सौंपे गए।

  • अधिकारियों को उनके मूल पदस्थापन से 100 से 150 किलोमीटर दूर के जिलों का अतिरिक्त कार्यभार (Additional Charge) दिया गया।

  • उदाहरण के तौर पर, उदयपुर संभाग के अधिकारियों को बांसवाड़ा और डूंगरपुर जैसे दूरस्थ जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई।

  • जयपुर की पाइपलाइन परियोजनाओं में अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए मोटी रकम के लेनदेन की चर्चाएं भी अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।


विभाग में 'महाभारत' और अनौपचारिक नेटवर्क

उस दौर में विभाग के भीतर का माहौल इतना अस्थिर था कि अधिकारी इसे मजाक में 'महाभारत' से जोड़कर देखते थे।

  • लीक होती थी सूचियां: आधिकारिक आदेश जारी होने से पहले ही कतिपय इंजीनियरों को पता चल जाता था कि अगली सूची में किसका नाम होगा और कौन APO होने वाला है।

  • अदृश्य ताकतों का असर: विभागीय गलियारों में यह धारणा पुख्ता हो गई थी कि आधिकारिक प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता है, जबकि असली निर्णय विभाग के बाहर बैठे कुछ प्रभावशाली लोग ले रहे थे।


जेजेएम घोटाले (JJM Scam) से जुड़ रहे तार

ACB की यह जांच राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़ी कड़ियों को जोड़ रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन सुनियोजित तबादलों का मकसद करोड़ों रुपये के जेजेएम टेंडर्स में बंदरबांट करना था।

यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो जलदाय विभाग के कई बड़े अधिकारियों और पूर्व सरकार के कद्दावर नेताओं की मुश्किलें बढ़ना तय है।


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