राजस्थान में 85,000 से अधिक शिक्षकों के तबादले अटके, शिक्षकों में भारी रोष

राजस्थान में 85,000 से अधिक शिक्षकों के तबादले अटके, शिक्षकों में भारी रोष

राजस्थान में 10 जनवरी तक विभिन्न विभागों में तबादले किए जाएंगे, लेकिन शिक्षा विभाग के 85,000 से अधिक शिक्षक अभी भी अपने स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति शिक्षकों में भारी रोष का कारण बनी हुई है।

क्या है मामला?

राजस्थान सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया है जिसमें 1 जनवरी से 10 जनवरी तक विभिन्न विभागों में तबादले करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इस आदेश में शिक्षा विभाग को शामिल नहीं किया गया है।

अगस्त 2021 से ही राज्य के 85,000 से अधिक तृतीय श्रेणी शिक्षक अपने स्थानांतरण के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। शिक्षक संगठन इस निर्णय से काफी नाराज हैं और सरकार पर शिक्षकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगा रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का विरोध

राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। संगठन के प्रदेश महामंत्री महेन्द्र लखारा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकार की इस नीति को शिक्षकों के प्रति उपेक्षापूर्ण बताया है। संगठन का कहना है कि सरकार ने पहले भी सभी विभागों में प्रतिबंध हटाकर स्थानांतरण किए थे, लेकिन शिक्षा विभाग को हमेशा ही नजरअंदाज किया गया है।

शिक्षकों की मांगें

शिक्षक संगठन की मांग है कि सरकार शिक्षकों के तबादले के लिए एक पारदर्शी नीति बनाए और सभी शिक्षकों को उनके गृह जिले में जाने का मौका दे। संगठन का यह भी कहना है कि सरकार को शिक्षा विभाग को अन्य विभागों के समान महत्व देना चाहिए।

क्यों अटके हैं तबादले?

शिक्षकों के तबादले अटके रहने के कई कारण हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव: लगातार बदलती सरकारों के कारण शिक्षकों के तबादलों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा पा रहा है।
  • तबादला नीति का अभाव: राज्य में शिक्षकों के तबादले के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
  • भ्रष्टाचार: तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं।

इसका प्रभाव

शिक्षकों के तबादले न होने से शिक्षकों में हताशा और निराशा बढ़ रही है। इससे शिक्षकों का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है, जो छात्रों पर भी असर डाल सकता है।

आगे क्या होगा?

शिक्षक संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह शिक्षकों के तबादले के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए। देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या निर्णय लेती है।

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