कोटा: कोटा रेल मंडल में टिकट निरीक्षकों (टीटीई) के समय-समय पर होने वाले स्थानांतरण (पिरियोडिकल ट्रांसफर) में अनियमितताएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है, जिसके चलते अनेक टीटीई 20 से 25 सालों से एक ही स्थान, यानी कोटा में ही जमे हुए हैं। जब इस मामले में अधिक शोर होता है, तो विभाग ऊपरी तौर पर उनका विभाग बदलकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, जबकि इसका खामियाजा अन्य टीटीई भुगतते हैं, जिन्हें गंगापुर और अन्य दूरदराज के स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाता है।
बताया जा रहा है कि डेढ़ साल पहले जारी की गई एक स्थानांतरण सूची पर भी अभी तक पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। इस देरी के कारण कई टीटीई अब सेवानिवृत्ति के करीब हैं, जिनका दो साल से भी कम का सेवाकाल बचा है। ऐसे में अब उनका स्थानांतरण व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
टीटीई स्थानांतरण में सबसे बड़ी कमी पारदर्शिता की बताई जा रही है। कुछ कर्मचारियों द्वारा इसका अनुचित लाभ उठाया जा रहा है। हाल ही में हुए स्थानांतरण में भी यही देखने को मिला, जहां कई टीटीई को मजिस्ट्रेट चेकिंग से हटाकर अन्यत्र तैनात कर दिया गया, जबकि कुछ को मजिस्ट्रेट चेकिंग में लगा दिया गया। कई टीटीई इसे नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं। अब इन कर्मचारियों को सोगरिया स्टेशन भेजने की तैयारी की जा रही है।
स्थानांतरण सूची की गोपनीयता भंग होने की आशंका भी जताई जा रही है। आरोप है कि आवधिक स्थानांतरण सूची जारी होने से पहले ही कुछ कर्मचारियों से नेम नोटिंग (पसंदीदा स्टेशन का उल्लेख) ले ली जाती है और सूची आने पर या उससे एक-दो दिन पहले ही उनकी नेम नोटिंग को कंफर्म कर दिया जाता है, जिससे उन्हें कोटा से बाहर नहीं जाना पड़ता। पिछले वर्ष दो कर्मचारियों का प्रमोशन पर कोटा स्थानांतरण हुआ था, लेकिन एक महीने के भीतर ही उन्हें उनके पहले के स्टेशन या उसके आसपास के स्टेशन पर वापस स्थानांतरित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि अपने चहेतों के नाम आवधिक स्थानांतरण सूची में होने के कारण कार्यालय नोट के अनुसार ही स्थानांतरण मान लिया जाता है। इसी वजह से कई कर्मचारी वर्षों से कोटा में ही जमे हुए हैं, जबकि जिनकी 'पहुंच' नहीं होती, उन्हें कोटा से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाता है। नियमानुसार, जब तक बिल यूनिट (वेतन इकाई) परिवर्तित नहीं होती, तब तक स्थानांतरण मान्य नहीं होता है।
इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी और चहेते कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने की प्रवृत्ति के कारण अन्य टीटीई में रोष व्याप्त है। वे मांग कर रहे हैं कि स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और सभी कर्मचारियों के लिए समान नियम लागू हों।
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