कोटा | रेलवे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य लाभों के लिए अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। कोटा रेल मंडल ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए 'प्री-रिटायरमेंट प्रोग्राम' की शुरुआत की है। इस पहल के जरिए रिटायरमेंट से पहले ही कर्मचारियों के दस्तावेजी विवादों और तकनीकी खामियों का निपटारा कर दिया जाएगा।
इस योजना के तहत आगामी 20 अप्रैल को एक विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसमें रिटायर होने वाले कर्मचारियों की सर्विस बुक से लेकर उनके व्यक्तिगत दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के अनुसार, अक्सर देखा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद नाम की स्पेलिंग, नियुक्ति तिथि या वेतन रिकॉर्ड में विसंगति के कारण पेंशन (PPO) जारी होने में महीनों लग जाते हैं। देरी की वजह से:
कर्मचारियों को समय पर पेंशन नहीं मिल पाती।
UMID कार्ड (मेडिकल कार्ड) नहीं बन पाता, जिससे वे मुफ्त इलाज से वंचित रह जाते हैं।
अन्य सेवानिवृत्ति लाभ (Settlement dues) अटक जाते हैं।
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें कर्मचारी के साथ-साथ प्रशासन के सभी संबंधित विभाग एक ही स्थान पर मौजूद रहेंगे, जिनमें शामिल हैं:
वेतन लिपिक (Bill Clerk) और एचआरएमएस डीलर।
सर्विस शीट डीलर और कल्याण निरीक्षक (Welfare Inspector)।
दस्तावेज सत्यापन: आधार कार्ड, पैन कार्ड और परिवार के दस्तावेजों की जांच।
त्रुटि सुधार: जन्मतिथि, वेतन निर्धारण और छुट्टी खाते (Leave Account) में सुधार।
बैंकिंग सहायता: पेंशन के लिए संयुक्त बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया की जानकारी।
बकाया भुगतान: यदि रिटायरमेंट से पहले का कोई एरियर या भुगतान शेष है, तो उसे भी सुनिश्चित किया जाएगा।
महत्व: भारतीय रेलवे में इस तरह की यह पहली अनूठी पहल है। इससे न केवल कर्मचारियों का तनाव कम होगा, बल्कि रेल प्रशासन के कामकाज में भी पारदर्शिता और गति आएगी।
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