बीकानेर | राजस्थान में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं के पुनर्भरण (Reimbursement) को लेकर निजी स्कूल संचालकों और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। प्राइवेट स्कूल्स फेडरेशन ने अब आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए शिक्षा विभाग को 15 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है।
फेडरेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लंबित भुगतान के आदेश जारी नहीं हुए, तो आगामी सत्र में इन कक्षाओं में नए प्रवेश (New Admissions) नहीं दिए जाएंगे। गुरुवार को फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने बीकानेर में अतिरिक्त निदेशक शैलेंद्र देवड़ा को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल ने ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए हैं:
पुराना बकाया: सत्र 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के भुगतान पर लगे सभी अवरोधों को हटाकर तुरंत राशि जारी की जाए।
कोरोना काल का भुगतान: कोविड काल के दौरान जिन स्कूलों ने ऑफलाइन पढ़ाई कराई थी, उन्हें बिना किसी शर्त के त्वरित भुगतान मिले।
यूनिट कॉस्ट में वृद्धि: पिछले 5 वर्षों से यूनिट कॉस्ट (प्रति छात्र खर्च) में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिसे वर्तमान महंगाई के अनुसार तर्कसंगत बनाने की मांग की गई है।
तकनीकी समाधान: पोर्टल पर तकनीकी कारणों से जो स्कूल भौतिक सत्यापन (Physical Verification) रिपोर्ट अपलोड नहीं कर पाए, उन्हें सुधार के लिए एक अंतिम अवसर दिया जाए।
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि भुगतान के आदेश जारी होने के बावजूद विभाग की ओर से धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे स्कूलों के संचालन में आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। फेडरेशन का आरोप है कि विभाग केवल आश्वासन दे रहा है, जिससे संचालकों का धैर्य अब जवाब दे चुका है।
अल्टीमेटम का असर: "हमने विभाग को 15 अप्रैल तक का समय दिया है। यदि हमारी मांगें अनसुनी रहीं, तो हम प्रदेश भर में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया को रोकने के लिए मजबूर होंगे।" — गिरिराज खैरीवाल, सचिव, प्राइवेट स्कूल्स फेडरेशन
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