कोटा। कोटा रेलवे स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों की जेब काटने और उन्हें मुफ्त मिलने वाले ठंडे पानी से महरूम करने का एक नया खेल सामने आया है। स्टेशन पर सक्रिय अवैध वेंडर और ट्रॉली संचालक यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए रेलवे द्वारा लगाए गए सार्वजनिक वाटर कूलरों का सरेआम दुरुपयोग कर रहे हैं। इन कूलरों के पानी से बोतलों को ठंडा कर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने का यह गोरखधंधा धड़ल्ले से पैर पसार रहा है।
यात्रियों से मिली शिकायतों के अनुसार, स्टेशन पर घूम रहे वेंडर और ट्रॉली वाले अपनी साधारण पानी की बोतलों को ठंडा करने के लिए उन्हें वाटर कूलर के भीतर या उसके ठंडे पानी के संपर्क में रख देते हैं। इसके अलावा, स्टेशन पर अनधिकृत रूप से पानी पिलाने वाले लोग भी दिनभर बाल्टियों और कट्टों में कूलर का ही ठंडा पानी निकाल-निकाल कर भर लेते हैं।
ठंडे पानी का संकट: इस लगातार हो रही पानी की चोरी का नतीजा यह होता है कि कुछ ही देर में वाटर कूलर का पूरा ठंडा पानी खत्म हो जाता है। इसके बाद जब कोई आम यात्री अपनी प्यास बुझाने कूलर के पास पहुंचता है, तो उसे केवल नॉर्मल या गर्म पानी ही हाथ लगता है।
स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि दिनभर में ऐसा एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार होता है। भीषण गर्मी और उमस के इस दौर में जब यात्रियों को वाटर कूलर से ठंडा पानी नहीं मिलता, तो वे मजबूरी में वेंडरों के जाल में फंस जाते हैं। प्यास बुझाने के लिए यात्रियों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है और उन्हीं वेंडरों से मजबूरी में ठंडे पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती हैं, जिन्होंने कूलर का पानी खत्म किया था।
चौंकाने वाली बात यह है कि वेंडरों द्वारा सार्वजनिक वाटर कूलरों से इस तरह लगातार पानी निकालने और बोतलों को ठंडा करने का यह खेल प्लेटफॉर्मों पर सरेआम चलता रहता है। इसके बावजूद स्टेशन पर गश्त करने वाली आरपीएफ (RPF) और कोटा रेल मंडल का वाणिज्य विभाग इन पर कोई कार्रवाई नहीं करता। यात्रियों ने मांग की है कि वाटर कूलरों के पास वेंडरों की इस मनमानी पर तुरंत रोक लगाई जाए ताकि आम रेल यात्रियों को उनका हक मिल सके।
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