जाट बडौदा में कौओं की मृत्यु के बाद प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट-गंगापुर सिटी

जाट बडौदा में कौओं की मृत्यु के बाद प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट-गंगापुर सिटी

मृत पक्षियोंं का निस्तारण प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाए

पशुपालन, वन एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को दिए निर्देश-गंगापुर सिटी
जिले में गत दिनों जिला मुख्यालय के महावीर पार्क एवं गंगापुर सिटी के जाट बडौदा में कौओं की मृत्यु के बाद प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। जिला कलेक्टर राजेन्द्र किशन ने इस संबंध में आवश्यक सावधानियां रखने, सतर्कता बरतने तथा स्थितियों पर कडाई से नजर रखने के संबंध में अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए है।कलेक्टर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने पशु पालन विभाग के अधिकारियों स्थिति की समीक्षा की। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अशोक गौत्तम ने बताया कि जिले में दूरभाष नंबर 7014900524 पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। कलेक्टर ने वन विभाग के अधिकारियों को विशेष पैट्रोलिंग करवाने, ग्रामीण क्षेत्र में विकास अधिकारियों के माध्यम से मृत पक्षियों की सूचना मिलने पर तुरंत नोडल अधिकारी एवं नियंत्रण कक्ष पर सूचित करने के निर्देश दिए गए है।कलेक्टर ने बैठक में निर्देश दिए कि गत दिनों महावीर पार्क एवं जाट बडौदा के पार्क जहां कौए मृत मिले थे, को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाए। इनको सेनेटाइज करवाया जाए। कहीं भी मृत पक्षी मिलने पर पशुपालन विभाग की आरआरटी टीम पहुंचकर निस्तारण करें। घडियाल सेंचुरी एवं अन्य स्थानों पर भी विशेष निगरानी रखी जाए। रणथंभौर टाइगर फोरेस्ट के अधिकारियों को भी पूरी सतर्कता बरतने तथा नियमित पेट्रोलिंग कर जानकारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने पोल्ट्री फार्म एवं अन्य स्थानों पर भी सतर्कता बरतने के संबंध में निर्देश दिए।जिले में गत दिनों महावीर पार्क में 22 एवं जाट बडौदा में 28 पक्षी मृत पाए गए हैं। इनके सैंपल जांच के लिए भोपाल भिजवाए गए है। बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को मुस्तैदी के साथ आपसी समन्वय रखते हुए प्रो एक्टिव रहकर कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में पक्षियों के पीने के पानी एवं चुग्गे वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखने तथा पानी में दवा डालने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। नगर परिषद आयुक्त एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृत पक्षी मिलने पर कोई उसे सीधे ना छूंए, इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों एवं नियंत्रण कक्ष पर दी जाए तथा पीपीई किट पहन कर ही मृत पक्षी का सैम्पल लें तथा उपयुक्त स्थान पर उसका निस्तारण करें।

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