डीएपी के स्थान पर एसएसपी, एचपीके को अपनाये

डीएपी के स्थान पर एसएसपी, एचपीके को अपनाये

डीएपी के स्थान पर एसएसपी, एचपीके को अपनाये
सवाई माधोपुर 20 सितम्बर। उपनिदेशक कृषि विस्तार राधेश्याम मीणा ने जिले के किसानों को खाद एवं उर्वरक के संबंध में एडवाइजरी जारी करते हुऐ सलाह दी है कि किसान सरसों फसल में डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट एवं यूरिया का प्रयोग करें।
सरसों एक तिलहनी फसल है और सल्फर तेल की मात्रा में वृद्धि करता है। एक डीएपी की कट्टे की जगह किसानों को तीन कट्टे सिंगल सुपर फास्फेट एवं एक कट्टा यूरिया का फसल बुवाई पूर्व उर्वरक काम में लेंवे। लागत में भी यह एक कट्टे डीएपी से कम पड़ता है। जबकि सल्फर तत्व अलग से मिलता है। इस वर्ष वर्षा पर्याप्त मात्रा में होने के कारण फसल क्षेत्र में पिछले सालों की तुलना में वृद्धि होगी।
एन.पी.के. का उपयोग भी कृषक डीएपी के विकल्प के रूप में काम में ले सकते है। क्योकि 12ः32ः16 एन.पी.के. में 12 प्रतिशत नत्रजन, 32 प्रतिशत फास्फोरस,16 प्रतिशत पोटाश पाया जाता है जबकि लागत डीएपी से कम आती है।
जिले में ग्राम सेवा सहकारी समिति एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों एवं इफको के बिक्री केन्द्रों पर एन.पी.के. (12ः32ः16) की उपलब्धता है। कृषक इनसे खरीद कर फसलों में प्रयोग कर सकते है। इनका परिणाम डीएपी से अच्छा है।
उप निदेशक कृषि (वि) ने जिले के कृषकों से अपील की है कि डीएपी की उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए एसएसपी प्लस यूरिया, या एन.पी.के. का प्रयोग सरसों बुवाई व अन्य फसलों की बुवाई में करें। जिले में पर्याप्त मात्रा में एसएसपी प्लस यूरिया, एन.पी.के. की उपलब्धता है।

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