अनन्त चतुर्दशी और सम्वत्सरी के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग – बामनवास

अनन्त चतुर्दशी और सम्वत्सरी के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग – बामनवास

अनन्त चतुर्दशी और सम्वत्सरी के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग
बामनवास 12 सितम्बर। राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के एक प्रतिनिधि मण्डल ने अशोक बांठिया और जिनेन्द्र जैन के नेतृत्व में मुख्य सचिव निरंजन कुमार आर्य के द्वारे पहुंचकर सर्वप्रथम सभी सहधर्मी युवाओं ने मुख्य सचिव से खतम खामणा की तो मुख्य सचिव निरंजन कुमार आर्य ने सभी को मिच्छामि दुक्कड़म कहा।
इसके बाद खुशनुमा माहौल में उनसे जैन समुदाय के पर्युषण महापर्व के दौरान मनाए जाने वाले विशिष्ट त्यौहार अनन्त चतुर्दशी और सम्वत्सरी के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित कर सरकारी स्तर पर मनाए जाने की मुख्य सचिव से गुहार लगायी। जिस पर मुख्य सचिव निरंजन कुमार आर्य द्वारा सर्कुलेट करवाने के लिए प्रतिनिधि मण्डल को आश्वस्त किया।
इस अवसर पर परिषद् के संरक्षक अशोक बांठिया ने बताया कि सम्वत्सरी और अनन्त चर्तुदशी के दिन धर्मोपासक वास व उपवास रखकर प्रातःकाल प्रभु और गुरू दर्शन करने के बाद चैबिसों भगवान की पूजा अर्चना, वृहत शान्तिधारा करने की परम्परा है तथा सांयकाल के समय जिनालयो में भगवान का कलाशाभिषेक करने के साथ – साथ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया कि जैन धर्म का हजारों वर्षों का लम्बा गौरवान्वित इतिहास है और वर्तमान समय मे सम्पूर्ण भारत में जैन समुदाय की जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है और राजस्थान में 1.5 प्रतिशत आबादी है।
पर्युषण महापर्व समूचे प्राणी जगत की सुख कामना करने के साथ -साथ पर्यावरण और मन की शुद्धि करने का बेहतरीन अवसर होता है। इस महापर्व की मुख्य बाते भगवान महावीर के मूल पाँच सिद्धान्तों पर आधारित हैं। जैन समुदाय के विशिष्ट पर्वों के महत्व को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को अन्नत चतुर्दशी और सम्वत्सरी के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित कर इसे सरकारी स्तर पर मनाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर प्रो. ज्ञानेन्द्र जैन, धर्मेन्द्र जैन, विनोद जैन, अंकित जैन, एकता जैन, कोमल जैन, धर्मचन्द जैन, अजय कुमार जैन आदि उपस्थित रहे।

G News Portal G News Portal
22 0

0 Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Leave a comment

Please Login to comment.

© G News Portal. All Rights Reserved.