वन भूमि में अतिक्रमण वन्यजीवों का जीवन संकट में
बौंली/ (प्रेमराज सैनी) उपखंड बौंली परिक्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर हजारों लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। जिसके कारण वन्यजीवों को विचरण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग 1 वर्ष से आए दिन बघेरे का मूवमेंट आबादी क्षेत्र में होने की खबरें प्रकाशित होती रहती है। आए दिन जानवरों का शिकार होने की खबरें प्रकाशित होती है। ग्रामीणों के नुकसान की खबरें प्रकाशित होती रहती है। बार-बार वन विभाग जिला मुख्यालय से वन विभाग की टीम बुलाई जाती है। वन्यजीवों को पकड़ने के लिए व अन्यत्र छोड़ने के लिए प्रयास किए जाते हैं तथा पकड़कर छोड़े भी जाते हैं। पर वास्तव में हकीकत कुछ और ही है। अरावली पर्वत माला इस श्रंखला का विशाल पहाड़ और पहाड़ के दोनों और वन विभाग की भूमि और उस भूमि पर धीरे-धीरे करके हजारों अतिक्रमणकारियों ने जंगल की जमीन पर कब्जा जमा कर सिकुड़ा दिया है। इसमें केवल अतिक्रमण कारी ही शामिल नहीं है। बल्कि राजनीतिक दल व ग्राम पंचायत जैसे सरकारी तंत्र भी शामिल है। जिन्होंने जंगल की जमीन में पट्टे बना दिए। ऐसे में वन्य जीव जाए तो कहां जाए। आबादी क्षेत्र में वन्यजीवों का मूवमेंट लाजमी है। घरों में घुस ना लाजमी है। शिकार करना लाजमी है। वन्यजीवों का भूख मिटाने के लिए शिकार करना लाजमी है। अगर लाजमी नहीं है तो अपनी भूख मिटाने के लिए वन्य भूमि पर कब्जा जमाना। अतिक्रमणकारियों कि सेटिंग, पहुंच, रुतबा, पर्सनालिटी के चलते इन पर संबंधित विभाग भी कार्यवाही नहीं कर पाते।
मझेवऴा में बघेरे का मुवमेंट वन विभाग ने देखा मौका
कुछ दिनों से ग्राम मझेवला मे बघेरे के मूवमेन्ट पर सूचना के बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी बौंली अनिल कुमार मीना मय स्टाफ भूपेन्द्र सिंह जादौन, हीरालाल गुर्जर, केदार प्रसाद शर्मा, बनबारी लाल, लड्डू गुर्जर द्वारा मौका मुआयना किया। आस पास खेतो मे वन्यजीव बघेरे के पगमार्क नही मिले। ग्रामीणो द्वारा बताऐ गये स्थान पर पगमार्क देखे गये,,खेतो मे जरख के पगमार्क मिले। ग्रामीणो को एतिहात के तौर पर पालतू जानवरो को सुरक्षित जगह बांधने व सावधानी बरतने के लिऐ कहा गया। जंगल के किनारे ढाणीयां होने से बघेरे के मूवमेन्ट की संभावना हो सकती है। स्थानीय वनकर्मीयो को ट्रेकिंग के निर्देश दिये गये।
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