स्वर्णिम विजय मशाल 1971 भारत-पाक युद्ध भूमि ‘‘लोंगेवाला’’ पहुंची
सवाई माधोपुर 10 जुलाई। इस वर्ष 1971 के युद्ध में भारत की शानदार जीत की 50वीं वर्षगांठ है। इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए, भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 2021 को स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।
विजय मशाल भारतीय सशस्त्र बलों के सभी रैंकों के बलिदान का प्रतीक है, जिसके कारण 1971 में निर्णायक जीत हुई। 10 जुलाई 2021 को लोंगेवाला युद्ध स्मारक पर वेस्टर्न कार्डिनल विक्ट्री फ्लेम को स्वर्गीय ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी, महावीर चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल की पत्नी श्रीमती सुरिंदर कौर चांदपुरी ने प्राप्त किया।
कोणार्क कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पी एस मन्हास ने 1971 के लोंगेवाला युद्ध में मातृभूमि के लिए वीरतापूर्वक लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी बहादुर सैनिकों के सम्मान में पुष्पांजलि अर्पित की। लेफ्टिनेंट जनरल पी एस मन्हास, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, कोणार्क कोर और स्वर्गीय ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी महावीर चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल दोनों एक ही गांव के है।
लेफ्टिनेंट जनरल पी एस मन्हास और श्रीमती सुरिंदर कौर चांदपुरी ने लोंगेवाला युद्ध स्थल के उसी स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 5 दिसंबर 1971 को (तत्कालीन मेजर) स्वर्गीय ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी ने 23 पंजाब की एक कंपनी की कमान संभालते हुए पाकिस्तानी हमले को विफल कर दिया और दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया और उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर किया।
आने वाले दिनों में विजय मशाल को भारतमाला के साथ साथ तनोट, और सम ले जाया जाएगा और आगे की यात्रा के लिए मुनाबाओ ले जाया जाएगा, यह भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और देशभक्ति की भावना को जगाएगा।