स्थानान्तरण के 1 माह बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं किया तो भारी किराया देना होगा
सवाई माधोपुर, 17 अगस्त। जिला कलेक्टर राजेन्द्र किशन ने सरकारी आवास में रह रहे कार्मिकों को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडो की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं ताकि उन्हें बेवजह परेशानी न हो।
निर्धारित मापदंड के मुताबिक कार्मिक के स्थानान्तरण के 1 माह के बाद 2 गुना किराया लगता है। तीसरे से छठे माह तक 3 गुना तथा 6 से 12 माह के बीच बाजार दर से किराया लिया जाता है। स्थानान्तरण के 1 साल बाद भी आवास खाली नहीं करने पर बेदखली की कार्रवाई की जाती है।
कार्मिक के रिटायर होने के 2 माह बाद से रिटायर होने के 4 माह बाद तक बाजार दर से किराया लिया जाता है। इसके बार बेदखली की कार्रवाई की जाती है। सरकारी आवास मे रह रहे कार्मिक की मृत्यु के 2 माह बाद से 6 माह बाद तक 3 गुना तथा 6 माह से 12 माह की अवधि में बाजार दर से किराया उस आवास में रह रहे आश्रित से लिया जाता है। मृत्यु के 1 साल बाद बेदखली की कार्रवाई की जाती है।
आवास आवंटन के 8 दिन के भीतर कब्जा नहीं लेने पर आवंटन निरस्त करने का प्रावधान है। सरकारी आवास में रह रहे कार्मिक ने उसी शहर में आवास बना लिया है या क्रय कर लिया है तो सरकारी आवास का सामान्य दर से 3 गुना किराया देना होगा। सरकारी आवास में निवासरत कार्मिक की मृत्यु पर उस आवास में रह रहे पति/पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति के बाद बिना वरियता उपयुक्त श्रेणी का आवास आवंटन होगा। प्रोबेशन वाले कार्मिक की प्रोबेशन के तत्काल बाद जो वेतन श्रृंखला होगी, उसी के आधार पर उसे प्रोबेशन काल में आवास आवंटन होगा। स्थानान्तरण के बाद लास्ट पेमेंट सर्टिफिकेट सामान्य प्रशासन विभाग को नहीं भिजवाने पर कार्मिक को भविष्य में राजकीय आवास का आवंटन नहीं होगा।