भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव मनाया
बामनवास 6 नवम्बर। भगवान महावीर के 2548 वे परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर जैन समाज पिपलाई द्वारा जैन धर्म के चैबीसवे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाणोत्सव और गुरू गौतम स्वामी केवलज्ञान महोत्सव पर दिगम्बर जैन मन्दिर मे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये। जिसमे युवाओं जिनेन्द्र भगवान की शान्तिधारा करने का कार्य सौपा गया जिसमे युवाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया और भगवान महावीर का मोक्ष निर्वाण और दीपोत्सव के तहत मन्दिर मे मंत्रोच्चार के साथ जयकारों के बीच सामूहिक निर्वाण लड्डू चाढ़ाया तथा साथ ही मे भगवान महावीर की अष्टद्रव्य से पूजा अर्चना की गयी।
इस अवसर पर समग्र जैन समाज के प्रवक्ता बृजेन्द्र जैन ने बताया कि अप्प दीपो भवः तुम स्वयं अपने दीपक बनो उधार की रोशनी से काम नही चलेगा स दीपावली का पर्व एकता का प्रतीक है, दीपक की कतार को देखकर ऐसा लगता है मानो एक सूत्र में हीरे मोती पिराये जा रहे हैं ससभी दीपक समताधारी भाई के समान एक दूसरे के साथ हिल मिलकर बैठ गये हो, देखो कितना प्रेम भाव है, कितना अपनत्व है, कितनी उदारता है, सभी जला रहे हैं ज्योति से ज्योति मिलाए किन्तु पूर्ण स्वतंत्र, स्वाभिमानी अपना है, प्रकाश लिए।
जैन ने बताया कि एक मिट्टी का दीपक तिल- तिल कर जल रहा है, मिल -मिल कर हंस रहा है स स्वपर प्रकाशक बन रहा है तो क्या मानव इनसे भी गया बीता है ? क्यो नही हम इनसे सीखें, भाई -भाई प्रेम से रहे, हमें दीपकों से अंतर की ज्योति जलाना सीखना है, जब हमारे अन्दर ज्ञान की लौ और सत्य का प्रकाश की चमक आएगी तो निश्चित ही जीवन में सरलता, समता व शान्ति आ जायेगी और यह होगा तभी जब हम इन दीपकों की भांति एक सूत्र मे बंधने का प्रयत्न करेगें स तभी हमारा दीपावली का पर्व मनाना सार्थक हो सकता है।