रोडवेज बसों में नियमों की उड़ाई जाती है धज्जियाँ यात्री होते परेशान-गंगापुर सिटी.

रोडवेज बसों में नियमों की उड़ाई जाती है धज्जियाँ यात्री होते परेशान-गंगापुर सिटी.

बस में यात्री बेबस

रोडवेज बसों में नियमों की पालना नहीं होने से यात्री होते परेशान-गंगापुर सिटी.
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में लगातार नियमों की धज्जियां उड़ रही है। नियमों की बसों में लिखे प्रावधानों तक का पालना नहीं किया जा रहा है। नियमों के अनुसार बसों में महिला एवं बिकलांगों के लिए सीट आरक्षित रखना अनिवार्य है। यह सभी बसों में लिखा हुआ भी है। लेकिन लापरवाही के चलते इसका पालना नहीं किया जा रहा है। इससे यात्रियों को लगातार असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। वही चालक व परिचालकों का बीड़ी सिगरेट पीकर कानून का मखौल उठाना आम बात है।
महिला की सीट पर पुरुष :
रोडवेज बसों में महिला आरक्षित सीट पुरुष यात्रियों का सफर करना आम बात है। जगह खाली दिखते ही पुरुष यात्री इन सीट पर बैठ जाते है। महिलाओं के आने पर भी वे उसी सीट पर डटे रहते है। इसके चलते महिलाओं को खड़े  रहकर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है।
निशक्त की जगह सशक्त:
रोडवेज में अनदेखी का आलम यह है कि विकलांग आरक्षित सीट पर भी सामान्य श्रेणी के लोग सफर करते देखे जा सकते है। खाली सीट दिखते ही लोग इन सीटों पर बैठ जाते है। विकलांग के बस में चढ़ने के बावजूद परिचालक उन्हे उठाने की जहमत नहीं उठाते। इससे सफर में बिकलांग को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
धूल खाते फस्र्ट एड बॉक्स:
चालक केबिन में फस्र्ट एड बॉक्स उपलब्ध है। रोडवेज की सभी बसों में यह  ध्येय बॉक्स की तरह लिखा होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि अधिकांश बसो मे यह उपलब्ध नहीं होता। जिन बसों में बॉक्स लगा हुआ है उनमें दवाओं व गोली का अभाव है। इसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ रहा है। सफर के दौरान यदि कोई यात्री चोटिल हो जाता है तो उसे प्राथमिक चिकित्सा तक नहीं मिल पाती ओर कई बार अस्पताल पहुंचने तक उसकी तबीयत बिगड़ जाती है।
मांगनी पड़ती है सुझाव पुस्तिका:
निगम की सेवा से किसी प्रकार की शिकायत पर सभी बसों में सुझाव पुस्तिका रखकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है। यह सुझाव पुस्तिका परिचालक के पास होती है। लेकिन परिचालक से शिकायत पुस्तिका मांगकर शिकायत दर्ज करवाना व्यवहारिक नहीं होता। इसके चलते यात्री शिकायत दर्ज नहीं करवाते। इस कारण शिकायत पुस्तिका शिकायते या सुझाव दर्ज नहीं हो रहे।वही कई बसों में तो केडक्टर के पास शिकायत पुस्तिका ही उपलब्ध नहीं है। ओर सुझाव पेटिका खाली ही पड़ी रहती है।
बसों में पी जाती बीडी-सिगरेट:
सार्वजनिक स्थानों पर बीडी-सिगरेट पीने पर रोक के लिए कानून बन चुका है। यहां तक की जुर्माना भी निर्धारित है। लेकिन बस में अधिकांश चालक बस स्टार्ट करते ही सिगरेट व बीडी जला लेते है। उनके ऐसा करने पर कुछ ओर यात्री भी शौक फरमा लेते है। जिससे अन्य यात्रियों को परेशान होना पड़ता है।
कराएगें दबा उपलब्ध
चालक केबिन में फस्र्ट एड बॉक्स जिन बसों में नहीं है। उनमें जल्दी लगवा दिए जाएगें। तथा फस्र्ट एड बॉक्स में दवा नहीं है। ऐसी बसों की जांच कर उनके चालक व परिचालको को उपलब्ध करा दिया जाएगा।
बहादुरसिंह मुख्य प्रबंधक हिण्डौन आगार

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