पहली ही बारिश में खुली सोगरिया स्टेशन की पोल, इसी महीने होना है उद्घाटन

पहली ही बारिश में खुली सोगरिया स्टेशन की पोल, इसी महीने होना है उद्घाटन

पहली ही बारिश में खुली सोगरिया स्टेशन की पोल, इसी महीने होना है उद्घाटन
कोटा।  सोगरिया स्टेशन की पोल पहली ही बारिश में खुल गई है। नया भवन पहली ही बारिश में टपक गया। दीवार टूट गई है। प्लेटफार्म की एप्रोच रोड बह गई। बेसमेंट में पानी भर गया। फर्श और टाइल्स बैठ गई। गुरुवार को निरीक्षण के दौरान संवाददाता को स्टेशन पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।
निरीक्षण के शुरुआत में ही प्लेटफार्म नंबर एक की करीब 50 मीटर पत्थर की दीवार गिरी नजर आई। इसके चलते बड़ी मात्रा में मिट्टी स्टेशन परिसर में बह गई। पौधे उखड़ गए। इसके बाद स्टेशन भवन के प्रवेश द्वार पर ही बारिश का पानी टपकता दिखा। दीवार, पिलर और बीम पानी से तर नजर आए। प्लेटफार्म नंबर एक पर ही कोटा स्टोन को उखाड़कर दुबारा लगाया जा रहा था।
पानी में बही अप्रोच रोड
निरीक्षण के दौरान बारां एंड की तरफ प्लेटफार्म नंबर 2 पर आने के लिए बनी अप्रोच रोड पानी में बह गई। पहले यहां से मिट्टी बही। इसके बाद सीसी रोड और इसके ऊपर लगी इंटरलॉकिंग टाइल्स बह गई।
प्लेटफार्म नंबर 2 पर ही शौचालय के आसपास का कोटा स्टोन का फर्श बैठ गया। इसके चलते यहां से कोटा स्टोन को उखाडा गया है। अब यहां पर दोबारा कंकरीट कर कोटा स्टोन को फिर से लगाया जाएगा।
बेसमेंट में भरा पानी
यहां पर स्टेशन भवन के नीचे बेसमेंट और कैंटीन में कई कई फुट पानी भरा नजर गया इस पानी को सबमर्सिबल और मोटर पंपों द्वारा निकाला जा रहा था। फर्श लेबल नहीं होने के कारण स्टेशन भवन के प्रवेश द्वार के पास ही पानी भी भरा नजर आया।
इसी महीने होना है उद्घाटन
उल्लेखनीय है कि सोगरिया को कोटा के सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अगस्त में ही इसके उद्घाटन की भी तैयारी की जा रही है। ऐसे में स्टेशन पर ऐसी खामी नजर आना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
पहले भी सामने आ चुकी है खामियां
यह पहला अवसर नहीं है जब सोगरिया स्टेशन पर कोई खामी नजर आई हो। इससे पहले भी यहां कई बार कमियां सामने आ चुकी हैं। यहां स्टेशन भवन में कई जगह दरारें पड़ने का मामला सामने आया था। बाद में रंगाई पुताई कर इन दरारों को छुपाने का प्रयास भी किया गया था। इसके बाद यहां पर तेज आंधी में प्लेटफॉर्म शेड की चद्दरें उड़ गई थीं। दीवार पर लगी टाइले तक हवा के झोंके से गिर गई थीं। स्टेशन भवन पर लगे भारी भरकर गुंबद भी तेज हवा से नीचे आ गिरे थे। लेकिन इसके बाद भी काम की गुणवत्ता में कोई विशेष सुधार नजर नहीं आया।
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