भगवान शिव शंकर के आठ प्रतीकों से मानव जीवन में सुख समृद्धि संतुष्टि एवं शांति के अचूक उपाय खण्डार

भगवान शिव शंकर के आठ प्रतीकों से मानव जीवन में सुख समृद्धि संतुष्टि एवं शांति के अचूक उपाय खण्डार

भगवान शिव शंकर के आठ प्रतीकों से मानव जीवन में सुख समृद्धि संतुष्टि एवं शांति के अचूक उपाय
खण्डार 9 मार्च। प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान शिव शंकर के आठ प्रतीक शक्तियों के विषय में बहुत कुछ लेखन लिखा गया है।
महाशिवरात्री के अवसर पर ज्योतिषाचार्य पं० मनोज कुमार शर्मा ने इन प्रतीकों की जानकारी देते हुऐ इनकी पूजा से होने वाले लाभों की जानकारी दी।
एक प्रतीक मे जैसे कि भगवान शंकर के मस्तक पर चंद्रदेव विराजमान हो रहे हैं। चंद्र देव का प्रतीक चिन्ह कि भगवान शंकर के साथ पूजा आराधना करने से मनुष्य के जीवन में शांति एवं संतुष्टि का समावेश होता है।
दूसरा प्रतीक मे जैसे कि भगवान शंकर शंकर की जटाओं में स्वयं गंगा माता विराजमान हो रही है। भगवान शंकर के साथ में गंगा माता की पूजा आराधना करने से मनुष्य के जीवन में शुद्ध विचार एवं आत्म शुद्धि का समावेश होता है।
तीसरा प्रतीक मे जैसे कि भगवान शंकर के गले में वासुकी नाग विराजमान हो रहे हैं, भगवान शंकर के साथ में बासुकीनाथ की पूजा करने से मनुष्य जीवन मे दुष्कर्म एवं संकटों का अंत होता है। ज्योतिष के अनुसार जिस मनुष्य की जन्म पत्रिका में कालसर्प दोष होता है। ऐसे कालसर्प दोष के जातकों का भगवान शंकर के साथ वासुकी नाग की पूजा आराधना करने से मनुष्य को कालसर्प दोष के कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।
चतुर्थ प्रतीक में जैसे कि भगवान शंकर ने अपने गले में रुद्राक्ष की मालाएं धारण कर रखिए। भगवान शंकर की पूजा आराधना करते हुए रुद्राक्ष की पूजा करके अगर मनुष्य गले में धारण करता है तो रोग एवं शारीरिक पीड़ा से मनुष्य को मुक्ति प्राप्त होती है। मुक्ति प्राप्ति होने के पश्चात मनुष्य आरोग्य शक्ति के साथ में अपना जीवन व्यतीत करने का लाभ प्राप्त होता है।
पंाचवे प्रतीक में जैसे कि भगवान शंकर ने अपने हाथों में त्रिशूल को धारण कर रखा है। भगवान शंकर के साथ में त्रिशूल की पूजा आराधना करने से मानव जीवन में 3 गुण, सत, रज, तम गुणों का मानव जीवन में समावेश होता है। तीनों कोणों का मानव जीवन में समावेश होने से मनुष्य परम संतुष्टि के साथ में भगवान शंकर की अमृत भक्ति का आनंद जीवन में प्राप्त करता है।
छठे प्रतीक में भगवान शंकर ने अपने हाथ में डमरू को ग्रहण कर रखा है। भगवान शंकर के साथ में डमरु की पूजा आराधना करने से मनुष्य के जीवन में वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है। मनुष्य वाक् सिद्धि से अपने जीवन में संसार में यश और कीर्ति को प्राप्त करता है। जिससे मनुष्य मर कर भी संसार में अमर रहता है।
सातवें प्रतीक में भगवान शंकर ने अपने शरीर पर सिंह छाल को धारण कर रखा है। भगवान शंकर की पूजा आराधना के साथ में सिंह छाल मुख की पूजा करने से मनुष्य के जीवन के कष्टों को सहन करने के लिए आत्मबल की प्राप्ति होती है। मनुष्य को आत्मबल की प्राप्ति होने से संसार के सभी कष्टों को सहन करने की क्षमता होती है। आत्मबल की प्राप्ति होने से मनुष्य हर कष्ट से निर्भय होकर अपना मनुष्य जीवन संतुष्टि के साथ में व्यतीत करता है।
आठवें प्रतीक में भगवान शंकर ने अर्थनारी स्वरूपा शक्ति को वाम भाग में शोभायमान बना रखा है। इसीलिए भगवान शंकर को अर्धनारीश्वर के नाम से भी जाना जाता है। अर्धनारीश्वर रूप की भगवान शंकर की पूजा आराधना करने से मनुष्य के ग्रस्त जीवन में पितृ वादा, गृह वादा वास्तु दोष एवं सभी प्रकार की बाधाओं से मनुष्य को मुक्ति प्राप्त होती है। बाधाओं से मुक्ति प्राप्ति के पश्चात अर्धनारीश्वर भगवान के स्वरूप की कृपा से मनुष्य को अपने जीवन में भक्ति रस के साथ में सुख समृद्धि संतुष्टि एवं परम शांति की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार से भगवान शंकर के साथ में 8 प्रतीक शक्तियों की पंचोउपचार के साथ में पूजा आराधना से मनुष्य अपने जीवन मैं सभी सफलता प्राप्त करते हुए मनुष्य जीवन को सफल बनाता है।

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