यूजीसी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को थमाया नोटिस, पूछा- "नियम प्रगतिशील होने चाहिए, पीछे ले जाने वाले क्यों?"

यूजीसी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को थमाया नोटिस, पूछा- "नियम प्रगतिशील होने चाहिए, पीछे ले जाने वाले क्यों?"

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' पर सुप्रीम कोर्ट ने न केवल रोक लगाई है, बल्कि केंद्र सरकार और यूजीसी को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा कि इन नियमों की भाषा अस्पष्ट है और यह समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं।

सुनवाई की 5 बड़ी बातें: कोर्ट रूम में क्या हुआ?

1. भाषा पर सवाल और दुरुपयोग का डर CJI ने कहा कि पहली नजर में इन रेगुलेशनों की भाषा स्पष्ट नहीं लगती। उन्होंने चिंता जताई कि अगर भाषा अस्पष्ट रही, तो इसका गलत इस्तेमाल (Misuse) हो सकता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रतिष्ठित लोगों की एक विशेषज्ञ समिति बनाई जानी चाहिए जो इन नियमों की समीक्षा करे।

2. "पीछे ले जाने वाला रुख" जस्टिस बागची ने संविधान के अनुच्छेद 15(4) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को पिछड़ों के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अधिकार है, लेकिन कानून प्रगतिशील होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, "हम उस दौर की ओर क्यों जा रहे हैं जहां भेदभाव की दीवारें और मजबूत हों? मुझे उम्मीद है भारत अमेरिका के उस पुराने दौर में नहीं जाएगा जहां नस्ल के आधार पर अलग स्कूल हुआ करते थे।"

3. पुराने नियमों (2012) की बहाली कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब तक इस मामले का निपटारा नहीं होता, तब तक 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने जब 2012 के नियमों की कमियों का जिक्र किया, तो CJI ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता नए नियमों की वैधता जांचना है।

4. फीस और सामान्य वर्ग पर राजनीति सुनवाई के दौरान वकीलों ने कोर्ट का ध्यान उन राजनीतिक बयानों की ओर खींचा जिनमें दावा किया गया था कि नए नियमों के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा सकता है। इस पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई और कहा कि शिक्षा संस्थानों में एकता दिखनी चाहिए, वैमनस्य नहीं।

5. समानता का सिद्धांत याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि यूजीसी का नया नियम 3(C) भेदभाव की परिभाषा को केवल एक वर्ग तक सीमित करता है, जो समानता के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने अंदेशा जताया कि इससे सामान्य वर्ग का छात्र बिना किसी ठोस आधार के "अपराधी" माना जा सकता है।


अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को जवाब देने के लिए समय दिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी। तब तक देश भर के विश्वविद्यालयों में नए नियम लागू नहीं किए जा सकेंगे।

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