मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए विषमता,भेदभाव,वैमनस्य पर रोक लगानी होगी"- प्रो.रमेश बैरवा

मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए विषमता,भेदभाव,वैमनस्य पर रोक लगानी होगी"- प्रो.रमेश बैरवा

राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर

"मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए विषमता,भेदभाव,वैमनस्य पर रोक लगानी होगी"- प्रो.रमेश बैरवा

"राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर में मानव अधिकार दिवस पर आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम रही सपना मीणा"


वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर में मानव अधिकार दिवस पर आयोजित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में छात्रा सपना मीणा प्रथम,सोनम द्वितीय एवं अनीशा मीणा तृतीय स्थान पर रही। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का संचालन भूगोल प्रवक्ता डॉ. ऋषिकेश गुर्जर ने किया।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता की।संकाय सदस्य डॉ.भूरसिंह गुर्जर,डॉ.संपूर्णानंद गौतम, डॉ.गिर्राज प्रसाद जोनवाल, विकल्प कामत,महेंद्र कुमार धोबी एवं मानसिंह मीणा ने सहयोग किया।

नोडल अधिकारी प्रो.रमेश बैरवा ने "वर्तमान परिदृश्य एवं हमारे मानव अधिकार" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि मानव अधिकारों की अवधारणा में अमेरिकी,फ्रांसीसी एवं रूसी क्रांति,साम्राज्यवाद एवं फासीवाद विरोधी आंदोलन,पूंजीवाद के आर्थिक संकट के परिणाम स्वरूप लोक कल्याणकारी राज्य की विचारधारा एवं अनेक बुद्धिजीवी एवं राजनेताओं का प्रमुख योगदान रहा है।
उग्र राष्ट्रवादी एडोल्फ हिटलर के लाखों लोगों के जनसंहार से बुरी तरह आहत विश्व के नेताओं ने मानव अधिकारों को संयुक्त राष्ट्र संघ के एजेंडे में प्रमुख स्थान दिलाया। गौरतलब है कि 1948 की "मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा" एक महिला एलेनोर रूजवेल्ट की अध्यक्षता में ही तैयार हुई थी। मानव अधिकार असल में वे अधिकार है जो हमें मनुष्य होने के नाते मिले हैं जो सरकार प्रदत नहीं हैं बल्कि सार्वभौमिक है। हम सभी में निहित हैं। रोटी,कपड़ा,मकान, शिक्षा,स्वास्थ्य,स्वतंत्रता,समानता, शोषण से मुक्ति,स्वच्छ पर्यावरण, सभी के लिए गरिमामय जीवन प्रमुख मानव अधिकार हैं।

प्रो.बैरवा ने कहा कि मानव अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तेजी से बढ़ती आर्थिक विषमता,जाति एवं जेंडर आधारित भेदभाव,धार्मिक वैमनस्य,बेरोजगारी,महंगाई, बिगड़ते पर्यावरण,अभिव्यक्ति की आजादी के हनन,श्रमिकों के शोषण एवं किसानों की बदहाली पर रोक लगानी होगी। सभी नागरिकों के लिए संविधान प्रदत्त गरिमामय जीवन के लिए अनुकूल सामाजिक एवं आर्थिक हालात पैदा करने होंगे। मानव अधिकार  आयोग को स्वतंत्र,सक्रिय एवं संवेदनशील होकर पीड़ितों को सही में न्याय दिलाना होगा।
https://youtu.be/LhpxJNAelcQ

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