Ajmer : मुगल शासन में ही गुरु तेग बहादुर ने स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। धर्मांतरण को भी रोका।

Ajmer : मुगल शासन में ही गुरु तेग बहादुर ने स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। धर्मांतरण को भी रोका।

मुगल शासन में ही गुरु तेग बहादुर ने स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत कर दी थी।

धर्मांतरण को भी रोका।

अजमेर रेंज के आईजी रुपिंदर सिंह ने संगत समागम में ज्ञानवर्धक और ऐतिहासिक जानकारी दी।
दिल्ली में आयोजित प्रकाश उत्सव के समारोह में निर्मल पंथ के संत डॉ. स्वामी रामेश्वरानंद भी भाग लेंगे।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्री माधव स्मृति सेवा संस्थान की ओर से 17 अप्रैल को अजमेर के विजयलक्ष्मी पार्क में गुरु तेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाशोत्सव पर आयोजित संगत समागम में अजमेर रेंज आईजी रुपिंदर सिंह ने लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। सिंह ने कहा कि मुगल काल में हो रहे धर्मांतरण का गुरु तेग बहादुर ने विरोध किया। वे नहीं चाहते थे कि हिन्दू समुदाय के लोग अपना धर्म परिवर्तन करें। जिस तरह से गुरु तेग बहादुर ने अपने जीवन काल में धर्मांतरण का विरोध किया उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उन्होंने मुगल काल में ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत कर दी थी।
Ajmer : मुगल शासन में ही गुरु तेग बहादुर ने स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। धर्मांतरण को भी रोका।
उनका पूरा जीवन एक तपस्वी योद्धा के तौर पर रहा। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार भ्रमण किया। उन्होंने किसी दूसरे के लिए मर मिटने की सिख दी। उनकी वाणी से हमें हमेशा प्रेरणा मिलती है। मजबूर की हमेशा रक्षा करनी चाहिए। अहंकार का त्याग कर संगत अच्छे लोगों की होनी चाहिए। एक अहंकार विचार हमें विनाश की ओर ले जाता है। आईजी रुपिंदर सिंह ने कहा कि कोरोना काल में संघ प्रेरित संस्थाओं तथा सिक्ख समाज के द्वारा जो सेवा कार्य किया गया उसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई है।
उन्होंने अपनी मातृ भाषा सीखने पर भी जोर दिया। आईजी सिंह द्वारा प्रस्तुत किए गए विचारों का संगत समागम में सभी प्रशंसा की। इस समारोह में राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जसबीर सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर अपने जीवन काल में कट्टरपंथ के सामने मानवता की प्रखर आवाज बन कर उभरे। उन्होंने औरंगजेब के बर्बर अत्याचार से हिन्दू समाज की रक्षा की। भारतीय संस्कृति की रक्षार्थ अपना बलिदान देकर उन्होंने सत्य के पथ पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इस्लाम, ईसाई, फारसी और यहूदी सभी बाहरी धर्म है, जबकि जैन, सिक्ख, हिन्दू और बौद्ध धर्म हमारे ही देश में उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि मुगल शासन में महिलाओं और कन्याओं पर बहुत अत्याचार हुए, इसकी वजह से ही देश में सती प्रथा, बाल विवाह, घुघट प्रथा जैसी कुरीतियों ने जन्म लिया। गुरु तेग बहादुर जी ने देश भर में घूम कर अपने प्रवचनों के माध्यम से हालातों को सुधारने के प्रयास किए।
उन्होंने छोटी छोटी जातियों को एकजुट करने का भी काम किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्री माधव स्मृति सेवा संस्थान के द्वारा संगत समागम किए जाने पर जसबीर सिंह ने आयोजकों को

बधाई दी। संगत समागम में भाई जसविंदर सिंह हजूरी रागी ने भजनों की प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया। समारोह में सुप्रसिद्ध कवि बक्शीश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक हिन्द का सागर का विमोचन भी किया गया। समारोह में संघ की क्षेत्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पुरुषोत्तम परांजपे, उद्योगपति एवं समाजसेवी गुरुविंदर सिंह सेहमी, श्री माधव सेवा प्रन्यास के सचिव बसंत कुमार विजयवर्गीय, सीमांत भारद्वाज आदि ने भी अपने विचार रखे। खाजूलाल चौहान ने समारोह का संचालन किया।
प्रकाश उत्सव के कार्यक्रम में भाग लेंगे:
गुरु तेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर 21 अप्रैल को दिल्ली के रेड फोर्ट में एक बड़ा कार्यक्रम हो रहा है। इस कार्यक्रम में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और देशभर के प्रमुख गुरुद्वारे से जुड़े प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। इस समारोह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। इस अवसर पर सिक्ख प्रतिनिधियों से पीएम मोदी मुलाकात भी करेंगे। समारोह में पीएम मोदी गुरु तेग बहादुर की स्मृति में सिक्का व डाक टिकट भी जारी करेंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस मंत्रालय के मंत्री जी किशन रेड्डी ने कुछ सिक्ख विद्वानों को खासतौर से आमंत्रित किया गया है। इनमें निर्मल पंथ के संत और पुष्कर स्थित निर्मल आश्रम के प्रमुख डॉ. स्वामी रामेश्वरानंद महाराज भी शामिल हैं। रेड्डी ने डॉ. रामेश्वरानंद को व्यक्तिगत पत्र लिखकर प्रधानमंत्री के समारोह में आमंत्रित किया गया है।

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