शिक्षा अधिकारी ने किया स्कूलों का निरीक्षण 

ढाई लाख बालिकाओं के लिए मात्र 92 स्कूल ?

बालिका विद्यालयों का अभाव, बीच में छूट रही पढ़ाई-

बाड़मेर. जिले में बालकों के साथ बालिकाएं भी शिक्षा को लेकर जागरूक है। आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली छात्राओं में पढऩे की ललक तो है, लेकिन सरकार का ध्यान नहीं है। इस पर बालिकाएं बीच राह पढ़ाई छोडऩे को मजबूर है। स्थिति यह है कि जिले में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालयों की तादाद पैंतालीस सौ से ज्यादा है लेकिन बालिका विद्यालय का आंकड़ा सौ को भी नहीं छू रहा, मात्र ९२ स्कू  ल ही बालिका विद्यालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। एेसे बालिकाओं की पढ़ाई बीच में ही छूट रही है।

जिले में बालिकाओं की पढ़ाई बीच में छूटने में बालिका विद्यालयों की कमी भी एक कारण है। जिले में वर्तमान में ४०१५ प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें से बालिका विद्यालय मात्र ७३ ही है। वहीं, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की तादाद ७०६ है जिसमें से १९ विद्यालय बालिकाओं के हैं। इसका असर यह है कि जैसे-जैसे बालिकाएं बड़ी कक्षाओं में आती है परिजन उनको पढ़ाई छुड़ा देेते हैं।

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यहीं कारण है पहली से पांचवीं तक तो बालिकाओं व बालकों का नामांकन लगभग बराबर रहता है। इसके बाद छठीं से आठवीं में इनमें अंतर तीन-चार हजार का आता है तो नवीं से बारहवीं में यह अंतर बढ़ कर तेेरह से पन्द्रह हजार हो रहा है।

को एज्युकेशन को नहीं तैयार अभिभावक- जिले में अधिकांश विद्यालय बालक-बालकाओं की सह शिक्षा के आधार पर संचालित हो रहे हैं अर्थात वहां बालक व बालिकाएं एक साथ पढ़ रहते हैं। छोटी कक्षाओं में अभिभावक बालिकाओं को बालकों के साथ भेज रहे हैं लेकिन उच्च कक्षाओं में वे एेसा नहीं कर रहे। इसके चलते जैसे-जैसे कक्षाओं का स्तर बढ़ रहा है बालिकाओं का नामांकन घटता जा रहा है।

आगे की पढ़ाई के अकेले रखने से भी परहेज- गौरतलब है कि बालिका माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की तादाद जिले में मात्र १९ ही है। इनमें से अधिकांश स्कू  ल बाड़मेर व बालोतरा शहर सहित बड़े कस्बों में हैं। यहां बालिकाओं को पढ़ाने के लिए उन्हें अकेले रखना पड़ता है। छात्राओं को शहर व कस्बों में कमरे लेकर रखने से अभिभावक परहेज बरत रहे हैं जिसके चलते बालिकाओं की पढ़ाई बीच में ही छूट रही है।

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विद्यालयों से जोडऩे का प्रयास- जिले में बालिका विद्यालय ९२ है। यह संख्या बालिकाओं के नामांकन को देखते हुए कम मानी जा सकती है। हमारा प्रयास तो यह रहता है कि हरेक बालिका स्कू  ल से जुड़े। अभियान चला जनजागरूकता की जाती है। काफी सफलता भी मिली है। विद्यालयों से जोडऩे का प्रयास रहेगा।- नरसिंगप्रसाद जांगिड़, सहायक निदेशक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी बाड़मेर

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