जो हाल अफगानिस्तान में अमरीका का हुआ वही हाल एक दिन पाकिस्तान में चीन का भी होगा। इसका असर भारत पर भी पड़ेगा।

जो हाल अफगानिस्तान में अमरीका का हुआ वही हाल एक दिन पाकिस्तान में चीन का भी होगा। इसका असर भारत पर भी पड़ेगा।
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14 जुलाई को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में एक बस में हुए आतंकी विस्फोट में चीन के 9 इंजीनियर और पाकिस्तान के श्रमिक मारे गए। चीनी इंजीनियर दसू बांध पर निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस हमले को कायराना बताया है तो चीन ने हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। सब जानते हैं कि इन दिनों चीन की रुचि पाकिस्तान में बहुत बढ़ गई है। चीन के लिए पाकिस्तान अब अमरीका से भी दोस्ती तोड़ दी है। पाकिस्तान इस बात से खुश हो रहा है कि भारत से मुकाबला करने के लिए चीन साथ दे रहा है। लेकिन पाकिस्तान में चीन के 9 इंजीनियर तब मारे गए हैं, जब पड़ोसी देश अफगानिस्तान में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन तालिबान का कब्जा हो चुका है। बीस वर्ष पहले अमरीका भी अफगानिस्तान में इसलिए घुसा था कि कट्टरपंथियों को भगा कर अफगानिस्तान का विकास किया जाए। पूरी दुनिया ने देखा कि इन बीस वर्षों में अमरीका बुरी तरह लहूलुहान हुआ और उसे अफगानिस्तान को छोड़ कर भागना पड़ा। अमरीका ने जो गलती अफगानिस्तान में की, वही गलती अब चीन पाकिस्तान में कर रहा है। हालांकि चीन अमरीका की तरह लोकतांत्रिक देश नहीं है, लेकिन चीन को लगता है कि वह पाकिस्तान की प्राकृतिक संपदा की लूट कर लेगा। चीन की पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बना कर एशिया महाद्वीप पर अपनी मर्जी थोपने की भी है। चीन और उसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग को यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान में बोद्ध धर्म को मानने वाले अनुयायी नहीं रहते हैं, बल्कि इस्लाम धर्म का कट्टरता के साथ पालन करने वाले लोग रहते हैं। चीन को भले ही अभी इमरान खान के शासन में सरकारी सुविधाएं मिल रही हो, लेकिन आखिर इमरान कब तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहेंगे? यदि विकास ही महत्व होता तो अफगानिस्तान से अमरीका को नहीं जाना पड़ता। चीन ज्यों ज्यों पाकिस्तान में पैर पसार रहा है त्यों त्यों फंसता जा रहा है। चीन को लगता है कि वह ताकत के बल पर पाकिस्तान में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा लेगा, यह चीन का मुगालता है। कट्टरपंथियों के सामने चीन की नहीं चलेगी। जब इमरान खान के शासन में चीन के 9 इंजीनियर एक साथ मौत के घाट उतारे जा सकते हैं, तब इमरान के न रहने की स्थिति में हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। चीन और पाकिस्तान अभी इसलिए भी खुश हो सकते हैं कि अफगानिस्तान से अमरीका भाग गया है, लेकिन आने वाले दिनों में अफगानिस्तान की घटनाओं का असर पाकिस्तान पर भी पड़ेगा और तब चीन भी लहूलुहान होगा। कट्टरपंथी चाहे अफगानिस्तान के हों या पाकिस्तान के सब एक हैं। भले ही रास्ते अलग अलग हो लेकिन विचारधारा एक है। मुस्लिम बाहुल्य पाकिस्तान में चीन की उपस्थिति किसी भी कट्टरपंथी को रास नहीं आएगी। भारत में रहने वाला हिन्दू समुदाय तो एक बार चीन का सम्मान कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले कट्टरपंथी अपने देश में कभी भी बौद्ध धर्म वाले चीन को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में होने वाली घटनाओं का असर भारत पर भी पड़ेगा। भारत के कई राज्यों में हिन्दू मुस्लिम का राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में भारत को और विपरीत परिस्थितियों से गुजरना होगा।