गांधी परिवार के विश्वस्त राजनेताओं की जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात। वहीं दिल्ली में सचिन पायलट का डेरा।

गांधी परिवार के विश्वस्त राजनेताओं की जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात। वहीं दिल्ली में सचिन पायलट का डेरा।
निजी कारणों से मिल रहे हैं दिल्ली-कर्नाटक के नेता-सीएमआर।
गहलोत और पायलट की रस्साकशी पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा का कटाक्ष।
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3 अगस्त को कर्नाटक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार चार्टर प्लेन से जयपुर पहुंचे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। इससे पहले 1 अगस्त को देर रात हरियाणा कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने भी दिल्ली से जयपुर आकर गहलोत से मुलाकात की। इन दोनों राजनेताओं को गांधी परिवार का विश्वस्त माना जाता है। दोनों नेताओं की जयपुर यात्रा को राजस्थान में गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों से जोड़ कर देखा जा रहा है। लेकिन सीएमआर (मुख्यमंत्री का सरकारी आवास) का कहना है कि दोनों राजनेता व्यक्तिगत कारणों से मुख्यमंत्री से मिले हैं। यानी कुमारी शैलजा का व्यक्तिगत काम इतना जरूरी था कि हवाई जहाज से रात को जयपुर पहुंची और दो घंटे मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के बाद सुबह हवाई जहाज से ही दिल्ली लौट गई। जबकि डीके शिवकुमार का व्यक्तिगत काम इतना जरूरी था कि उन्हें चार्टर प्लेन लेकर जयपुर आना पड़ा। सीएमआर चाहे कुछ भी कहे लेकिन जानकार सूत्रों के अनुसार गहलोत से मुलाकात के बाद कुमारी शैलजा और शिवकुमार ने दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से मुलाकात की है। सूत्रों की मानें तो दोनों नेताओं ने मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों के बारे में गांधी परिवार का संदेश गहलोत को दिया है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि बदली हुई परिस्थितियों में गांधी परिवार और अशोक गहलोत के बीच संवाद नहीं हो पा रहा है। हालांकि अभी तक अशोक गहलोत ने गांधी परिवार के सभी दिशा निर्देशों को माना है, लेकिन इस बार गहलोत के सामने विपरीत परिस्थितियां बताई जा रही हैं। राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालातों में गहलोत के प्रतिद्वंदी नेता सचिन पायलट की चुप्पी भी बहुत मायने रखती है। पायलट गत 27 जुलाई से ही दिल्ली में डेरा जमा हुए हैं। पायलट का अभी जयपुर आने का कोई कार्यक्रम नहीं है। माना जा रहा है कि दिल्ली में पायलट का गांधी परिवार से लगातार संपर्क बना हुआ है। भले ही गांधी परिवार से मिलने की खबरें सार्वजनिक नहीं की जा रही हो, लेकिन पायलट को उम्मीद है कि इस बार गहलोत पर दबाव बनाया जाएगा। प्रदेश प्रभारी महासचिव अजय माकन विधायकों की रायशुमारी के बाद भले ही गहलोत को खुश करने वाला बयान दे गए हो, लेकिन माकन ने गांधी परिवार को जो रिपोर्ट सौंपी है, उससे सचिन पायलट उत्साहित हैं। जानकारों की मानें तो पायलट ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से इस बार गांधी परिवार और अशोक गहलोत को आमने सामने कर दिया है। यदि निकट भविष्य में मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं भी होता है तो भी अशोक गहलोत के सामने अनेक राजनीतिक चुनौतियां रहेंगी। गहलोत को यह कतई पसंद नहीं है कि गांधी परिवार पायलट को महत्व दे, लेकिन इस बार पायलट ने गांधी परिवार का भरोसा भी रखा है। पायलट ने 2023 में होने वाले चुनावों में स्वयं की उपयोगिता और महत्व के बारे में गांधी परिवार को अवगत करा दिया है। पायलट के समर्थकों का मानना है कि जिस प्रकार पंजाब में मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह की नाराजगी की परवाह किए बगैर गांधी परिवार ने नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया उसी प्रकार राजस्थान में भी गांधी परिवार बड़ा बदलाव करेगा। इस बदलाव में पायलट की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
दारा का कार्टून:
अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रही राजनीतिक रस्साकशी पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने कार्टून बनाया है।