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एसएनसीयू भवन छोटा,मां और शिशुओं को होती परेशानी

एसएनसीयू भवन छोटा,मां और शिशुओं को होती परेशानी

एसएनसीयू भवन छोटा,मां और शिशुओं को होती परेशानी

राजकीय सामान्य चिकित्सालय के हॉल की बढ़े लम्बाई तो मिले राहत-गंगापुर सिटी
राजकीय सामान्य चिकित्सालय में एसएनसीयू भवन की लम्बाई कम होने की वजह से शिशुओं सहित उनकी मांताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कहने का मतलब यह है कि एसएनसीयू भवन अभी फिलहाल एक छोटे से हॉल में चल रहा जो कि एसएनसीयू भवन में चलने लायक नहीं है। जबकि इस एसएनसीयू में एक माह में 50 से 60 शिशु भर्ती होते है। अगर इस भवचन की लम्बाई बढ़ सके तो नवजात शिशुओं को और बेहतर सुविधाएं मिल सकती है।सामान्य चिकित्सालय में दो साल पूर्व न्यू बोर्न स्टेबलाइज्ड यूनिट (एनबीएसयू) को राज्य सरकार द्वारा 35 लाख रुपए का बजट जारी करने के बाद सामान्य चिकित्सालय का एनबीएसयू को अपग्रेड करने के बाद अस्पताल में नया एसएनसीयू बनाया था। लेकिन प्रतिदिन बीमार बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एवं बच्चों की मां बाहर से आए तो उसे कहा बैठाया जा सके। साथ ही बच्चों को मां दूध कहा पर पिलाए। यह इस समय उनकी मांओं को चुनौती बनी हुई है। इस संबध में विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। लेकिन अभी तक समस्याएं बरकरार बनी हुई है।वर्तमान में एनबीएसयू में प्रतिदिन 5 से 10 बच्चे भर्ती होते हैं लेकिन इसकी लम्बाई बढ़ने पर 20 से 25 बच्चे प्रतिदिन भर्ती हो सकेंगे।
बढ़ेगी थैरेपी और वार्मर मशीन
सामान्य चिकि त्सालय में एसएनसीयू में थैरेपी मशीन व वार्मर मशीनों की संख्या कम है। इसके लिए विभाग को बढ़ाने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। चिकित्सा सूत्रों के अनुसार वर्तमान में 9 बार्मर मशीन लगी हुई है। तीन ओर की आवश्यक है। इसी प्रकार फोटो थैरपी सात लगी हुई है। तीन ओर लगाने की आवश्यक है। इसी प्रकार पल्स ऑक्सीजन मीटर 4 लगे हुए है। पांच और की आवश्क है। इसी प्रकार इंफीजन पम्प वर्तमान में 4 लगे हुए है। 6 और आवश्क है।
उपखण्ड में एक ही केन्द्र
गंगापुर सिटी का सामान्य चिकित्सालय उपखंड के अलावा करौली जिले के नादौती, सपोटरा, कुडग़ांव, सलेमपुर, बामनवास के लोगों के उपचार का एकमात्र केन्द्र है। पूरे इलाके में एक मात्र एसएनसीयू भी यहीं है। यहीं पर आसपास के निजी चिकित्सालयों से भी नवजात उपचार के लिए भेजे जाते है। ऐसे में नवजातों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
क्या है यूनिट ,ये सुविधाएं
शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए चिकित्सालय में एसएनसीयू की स्थापना की गई है जिसमें लाइट गुल होने की स्थिति में ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध है। यूनिट संचालन के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश मीणा को जिम्मेदारी सौंप रखी है। डॉ. मीणा ने बताया कि प्रसव के बाद नवजात की तुरंत देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में इन्हें अनुकूल तापमान के लिए एसएनसीयू में रखा जाता है। इस यूनिट में उन बच्चों को रखा जाता है जिनमें जन्म के बाद कोई हलचल नहीं होती, रोते नहीं है या फिर समय पूर्व प्रसव हो जाता है। इसके अलावा वजन कम होने, दूध नहीं पीने, अधिक ठंडा होने तथा उल्टियां करने वाले शिशुओं को भी इस यूनिट में रखा जाता है।
इनका कहना
राजकीय चिकित्सालय का एसएनसीयू भवन की लंबाई कम होने से सार व्यवस्था एक हॉल में संचालित होने से शिशुओं व उनकी मांताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बच्चे को दूध हॉल से बाहर ले जाकर पिलाना पड़ रहा है। अगर ीावन की लम्बाई बढ़ जाती है तो शिशुओं सहित मांओं की सुविधाएं मिल सकेगी।डा. मुकेश कुमार मीना,एसएनसीयू यूनिट प्रभारी सामान्य चिकित्सालय गंगापुर सिटी।

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