पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में विशेष स्वच्छता अभियान 2.0 का सफलतापूर्वक आयोजन

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में विशेष स्वच्छता अभियान 2.0 का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। विशेष अभियान 2.0 की शुरुआत 14.09.2022 को प्रारंभिक चरण के साथ हुई, जिसमें लंबित संदर्भों और निपटारा की जाने वाली वस्तुओं की पहचान की गई। 30.09.2022 को प्रारंभिक चरण की समाप्ति के बाद, अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत 02.10.2022 को हुई।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 73 अभियान स्थलों की पहचान की गई, जिनमें संबद्ध/ अधीनस्थ संगठन शामिल हैं जैसे भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया, नेशनल जूलॉजिकल पार्क, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री, सालिम अली पक्षी-विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि।

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा सुझाए गए 11 मापदंडों के आधार पर लंबित मामले वाले इन 73 अभियान स्थलों की पहचान की गई। ये मापदंड लंबित संसदीय आश्वासन, लंबित कैबिनेट प्रस्ताव, लंबित सार्वजनिक शिकायतें और अपीलें, सांसदों, राज्य सरकार, पीएमओ के लंबित संदर्भों और निपटारा करने के लिए ई-कचरा तथा पहचान की गई कबाड़/ कचरे की मात्रा।

31.10.2022 तक प्राप्त प्रमुख उपलब्धियां-

73 अभियान स्थलों में 174 टन कबाड़ का निपटारा किया गया जिसमें लकड़ी और धातु के अपशिष्ट शामिल हैं। कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, स्कैनर सहित ई-कचरे की 8500 से ज्यादा वस्तुओं का भी निपटारा किया गया। मंत्रालय के साथ-साथ अधीनस्थ संगठनों/ संबद्ध कार्यालयों में 41,000 वर्ग फुट से ज्यादा कार्यालय जगहों का सृजन किया गया। एक माह की अवधि वाले स्वच्छता अभियान 2.0 के दौरान सांसदों के लंबित संदर्भों में से 71 संदर्भों का निपटारा किया गया। अभियान के दौरान लंबित 1182 जन शिकायतों में से 1029 जन शिकायतों का समाधान किया गया।

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अभियान के दौरान, मंत्रालय द्वारा नियमों/ प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया जिसमें ईसी की आवश्यकता से गोदामों को छूट प्रदान करना और हवाई अड्डों के रखरखाव के लिए पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता नहीं के लिए स्पष्टीकरण जारी करना है और पंप भंडारण परियोजनाओं की एक अलग श्रेणी, ईसी में तेजी लाने के लिए अक्षय ऊर्जा उत्पादन (स्वच्छ ऊर्जा) के लिए उपयुक्त पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय आदि।

भारतीय प्रायद्वीपीय तट और द्वीप तट के विभिन्न इलाकों में स्कूलों तथा कॉलेज के छात्रों को शामिल करते हुए जेडएसआई द्वारा तटीय सफाई गतिविधियों की शुरूआत। जेडएसआई के कर्मचारियों के अलावा 673 स्कूलों और कॉलेज के छात्रों की भागीदारी से 13 समुद्री तटों में कुल 16 किलोमीटर की सफाई की गई।

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जीबी पंत संस्थान के सिक्किम क्षेत्रीय केंद्र (एसआरसी) में संस्थान परिसर में रहने वालों और एसआरसी के कर्मचारियों तथा तक्ष इंटरनेशनल स्कूल और एनबीबी कॉलेज के छात्रों को अपशिष्ट पृथक्करण, इसका उचित प्रबंधन और बायोडिग्रेडेबल कचरे का उपयोग करके जैव एवं वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

जीबी पंत संस्थान के हिमाचल रीजनल सेंटर में प्लास्टिक और ग्लास के रूप में नॉन बायोडिग्रेडेबल कचरे को इको-ईंटों में परिवर्तित किया जाता है। इको-ईंट मशीन का उपयोग करते हुए पीईटी बोतलें और एकल-उपयोग प्लास्टिक रैपर को इंटरलॉकिंग ईंटों में तब्दील किया जाता है।

नई दिल्ली स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री ने भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और सवाई माधोपुर ने अपने क्षेत्रीय केंद्रों में स्कूली बच्चों के लिए ‘ग्रीन वार्ता’ का आयोजन किया जिससे उन्‍हें ऐसी आदतों को अपनाने के लिए संवेदनशील बनाया जा सके, जो पर्यावरण को स्वच्छ, साफ और स्वस्थ रखने में सहायक होंगी और उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद साबित होंगी। स्कूलों में पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए हरित शपथ भी दिलाई गई।

एमजी/एएम/एके/वाईबी