स्वच्छ भारत मिशन- शहरी 2.0 ने पूरे शहरी भारत में खुले में शौच से मुक्त होने की स्थिति को बनाए रखने के लिए संशोधित स्वच्छ प्रमाणन प्रोटोकॉल जारी किया

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, कार्यान्वित किया जा रहा है। मंत्रालय ने ओडीएफ़, ओडीएफ़+, ओडीएफ़++ और जल+ प्रमाणन के लिए संशोधित स्वच्छ प्रमाणन प्रोटोकॉल जारी किया है। नई दिल्ली के निर्माण भवन में कल प्रोटोकॉल जारी करने के लिए आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के सचिव श्री मनोज जोशी ने की और इसमें विभिन्न हितधारकों जैसे राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों, शहरों और इस क्षेत्र के भागीदारों के अधिकारियों ने भाग लिया।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान, भारत से खुले में शौच की बुराई को समाप्त करने के लक्ष्य को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकता बनाया गया था। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती को उस दिन के रूप में चुना गया था जिसके द्वारा शहरी भारत के सभी शहरों और वैधानिक कस्बों को 100 प्रतिशत खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनने के लिए चुना गया था। नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने और स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता में लगातार सुधार करके, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी का पहला चरण इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा और 100 प्रतिशत शहरी भारत को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया। लेकिन, मिशन का जनादेश शहरी भारत को ओडीएफ बनाने से परे है।

 

एसबीएम-यू के माध्यम से, भारत ने अपने लिए एक सफल स्वच्छता की गाथा लिखी है जो महात्मा गांधी की स्वच्छ भारत की परिकलपना के लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है। मिशन शुरू होने के सात साल बाद, लाखों नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को सम्मान और सुरक्षा प्रदान की गई है। स्वच्छता के नए लक्ष्यों की ओर लगातार बढ़ते हुए इन स्वच्छता उपलब्धियों को बनाए रखना समय की आवश्यकता है। संशोधित प्रोटोकॉल, एसबीएम-2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है और यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है:

 

इसमें स्वच्छ शहरी भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) व्यवस्था के साथ शहरों को मजबूत बुनियादी ढांचे के लिए प्रोत्साहित करने के प्रावधान शामिल हैं। प्रत्येक प्रमाणीकरण के लिए मुख्य हस्तक्षेप हैं:

 

संशोधित स्वच्छ प्रमाणन प्रोटोकॉल का शुभारंभ करते हुए, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव, श्री मनोज जोशी ने प्रमाणन प्रक्रियाओं को और अधिक व्यापक बनाने के लिए लगातार विकसित होने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “एक प्रोटोकॉल का विकास एक सतत प्रक्रिया है, और हम एक सरल प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संशोधित स्वच्छ प्रमाणन प्रोटोकॉल अधिक व्यावहारिकता उन्मुख है और इसे अधिकारियों तथा नागरिकों के लिए बेहतर ढंग से समझने के लिए सरल बनाया गया है। प्रोटोकॉल का उद्देश्य न केवल शहरों की रैंकिंग में सुधार करना है बल्कि मिशन की भावना को प्राप्त करने के लिए शहरों को प्रेरित करना है।”

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शुभारंभ कार्यक्रम में बोलते हुए, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक सुश्री रूपा मिश्रा ने प्रमाणन प्रक्रियाओं को सरल और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा, “स्वच्छता क्षेत्र में, सभी के लिए एक आकार का दृष्टिकोण इस क्षेत्र की बढ़ती मांगों और जरूरतों को पर्याप्त रूप से पूरा करने में विफल रहेगा। हम सभी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अनूठे तरीकों से स्वच्छता संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए निरंतर नवोन्मेष करें। सभी शौचालयों के संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि हम देश की ओडीएफ उपलब्धियों को बनाए रख सकें।”

शुभारंभ कार्यक्रम के बाद स्वच्छ टॉक का तीसरा एपिसोड हुआ, जो शहरों और राज्यों के साथ साथ सीखने को बढ़ावा देने के लिए मिशन की प्रमुख पहल है। मिशन के अंतर्गत आईईसी पहल पर ‘सफाई मित्र सुरक्षा’ शीर्षक वाले पहले एपिसोड और ‘स्वच्छता की ज्योत’ नामक दूसरे एपिसोड के साथ, तीसरे संस्करण का शीर्षक “स्वच्छ प्रमाणन: शहरी परिवर्तन का चेहरा” था, इसका उद्देश्य शहरों, राज्यों और संगठनों द्वारा तैनात किए जा रहे अनूठे और अभिनव शौचालय समाधानों पर अधिकारियों की क्षमता का निर्माण करना है।

 

 

प्रयागराज के आयुक्त, श्री चंद्र मोहन गर्ग ने सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव के लिए वर्ष 2019 में कुंभ मेले के दौरान मेजबान शहर द्वारा अपनाई गई स्वच्छता संबंधी रणनीतियों को साझा किया। आसान रखरखाव के लिए फाइबर युक्त प्लास्टिक और प्रीफैब स्टील शौचालयों से बने शौचालय स्थापित किए गए थे। कुंभ मेला 2019 के दौरान, लगभग 17,000 शौचालयों की स्थापना की गई थी, जिसमें इकाइयों को सीवेज नेटवर्क से जोड़ने की कोई संभावना नहीं थी। इस प्रकार, शहर ने कुशल सीवेज प्रबंधन के लिए 250 से अधिक ट्रक और दो अस्थायी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए। इसके अतिरिक्त, शहर में कुंभ मेले के दौरान अच्छे व्यवहार को सुनिश्चित करने के लिए 1,500 से अधिक स्वयंसेवकों द्वारा संचालित व्यापक अभियान आयोजित किए थे।

 

विजयवाड़ा में स्वच्छता के बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा करते हुए, नगर आयुक्त श्री स्वप्निल पुंडकर ने नम्मा शौचालय मॉडल की उपयुक्तता का उल्लेख किया। ये मॉड्यूलर शौचालय हैं जिन्हें दो महीने के भीतर स्थापित किया जा सकता है और किसी भी समय संशोधन की गुंजाइश प्रदान करते हैं। अब, अधिकांश स्थान “पीले धब्बों” से मुक्त होने की राह पर हैं। इसके अतिरिक्त, यूएलबी ने शहर में समावेशी स्वच्छता बुनियादी ढांचे तक पहुंच में सुधार के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों जैसी सुविधाओं के साथ वातानुकूलित ‘सुलभ कॉम्प्लेक्स’ को शामिल करने की अपनी कार्य योजना भी साझा की।

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स्वच्छ टॉक को संबोधित करते हुए भोपाल के नगर आयुक्त श्री के.वी.एस. चौधरी ने प्रभावी शौचालय मॉडल प्रस्तुत किए जो शहर में काम कर रहे हैं जैसे कि एसएचई लाउंज, बायो टॉयलेट और फ्रेश रूम सभी के लिए गरिमा और स्वच्छता तक पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर देते हैं।

 

निजी क्षेत्र के संगठन भी वेबिनार का हिस्सा थे। टॉयलेट बोर्ड गठबंधन के सुनील अग्रवाल ने सकारात्मक स्वास्थ्य परिणामों और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राप्त करने के लिए इस क्षेत्र में बढ़ते स्टार्टअप का समर्थन करने के साथ-साथ शौचालयों को स्वचालित करने की आवश्यकता के बारे में बात की। उन्होंने त्वरक कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया जो अभिनव स्वच्छता समाधान प्रदर्शित करेंगे जिन्हें बड़े पैमाने पर चलाया जा सकता है और मिशन के साथ जोड़ा जा सकता है।

श्री अभिषेक नाथ ने ‘लू कैफे’ मॉडल प्रस्तुत किया, जो एक स्थायी सार्वजनिक-निजी-भागीदारी आधारित मॉडल है जो सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव और संचालन के लिए एक उपयोगकर्ता शुल्क लेता है। एरम साइंटिफिक, केरल की सुश्री श्रीजा संतोष ने सार्वजनिक शौचालयों के लिए आईओटी आधारित ई-शौचालय व्यवसाय मॉडल के लिए एक केस स्टडी प्रस्तुत की। अंत में, फ्रेश रूम्स हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के श्री आशुतोष गिरी ने सार्वजनिक शौचालयों के लिए क्लाउड आधारित ई-टॉयलेट बिजनेस मॉडल पेश किया।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, को 1 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री द्वारा ‘कचरा मुक्त शहर’ बनाने के समग्र दृष्टिकोण के साथ शुरू किया गया था। इसने 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए नए वित्त पोषित घटक के रूप में प्रयुक्त जल प्रबंधन की शुरुआत की है। यह शहरी भारत में समग्र उपयोग किए गए जल प्रबंधन ईकोसिस्टम में सुधार के लिए मिशन की प्रतिबद्धताओं को प्रदर्शित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी अप्रयुक्त पानी जल निकायों (जल + प्रोटोकॉल के अनुसार) में नहीं छोड़ा जाता है। मिशन के तहत, सीवर और सेप्टिक टैंकों में उनके सफाई कार्यों के मशीनीकरण के माध्यम से खतरनाक प्रवेश के उन्मूलन के साथ-साथ उपचारित उपयोग किए गए पानी का अधिकतम पुन: उपयोग एक प्रमुख क्षेत्र है।

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